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शुक्रवार, 23 अक्टूबर 2015

रंग-ए-जिंदगानी: लघु-कथा - मजबूरी या समझदारी

रंग-ए-जिंदगानी: लघु-कथा - मजबूरी या समझदारी: शर्मा जी ने जब अपने बेटे राजेश से अपने खर्चे के सिए कुछ पैसे मांगे, तो राजेश नाक-भौं सिकोड़ने हुए बोला, “ पिताजी आपका क्या हैं ? आप तो ...

शुक्रवार, 9 अक्टूबर 2015

मैं ही बूढ़ा हूॅ


 

 

रात को जब बिल्ली बर्तन गिराती है

तब माॅ भय से जाग जाती है

कि बिल्ली -

पी जाएगी सारा दूध बच्चे की

तब कैसे मिटेगी भूख बच्चे की

हांलाकि बच्चा हाता है मेरा

फिर भी माॅ का मन चिंता में लेता है फेरा

माॅ बुदबुदाती है

उठकर टार्च जलाती है

और बिल्ली को कमरे से भगाती है

इस बीच खलल होती है उंघाई में

मैं सहसा कह उठता हूं

माॅ!

क्या माॅ?

सोने भी दो

मत करो खटर पटर इतनी रात को

उठकर फला फला काम करना है प्रभात को।







थोड़ी देर बाद

जब होती है आधी रात

अचानक रोने लगता है बच्चा

पत्नी मनाती है

छांती से लगा दूध पीलाती है

तब भी नहीं होता चुप

तब माॅ तोड़कर आती है नींद कच्चा

लेकर अपने हाथ में बच्चा

पल भर में ही कर देती है अच्छा

फिर वह जब जाता है सो

माॅ देती है पत्नी को खूब हिदायतें

पर मैं नहीं सुगबुगाता बिस्तर से

मगर सोए सोए ही कह देता हूॅ

माॅ बोलो मत ,

सोने दो।





जब लगती है भूख

हाॅ भूख !

तब पत्नी नहीं

अक्सर माॅ लाती है खाना

जग में पानी व गिलास

और हम अपाहिज की तरह

एक जगह बैठकर तोड़ते है

गरम व नरम रोटियां

व पत्नी खेल रही होती है

पड़ोस के बच्चियों के साथ गोटियां

और माॅ पूछ पूछ कर खिलाती है

जैसे की वो हैघर की दासी।



पिता की बात ही छोड़ो

पूरा दिन नहीं होता उनका दर्शन

क्यांेकि वे करते रहते हैं खेतों में

निज शरीर का घर्षण

वो पीसतें हैं स्वयं को

जैसे चक्की में गेहूं

जैसे कोल्हू में गन्ना

और हम बनकर

घर में बैठे होते हैं नबाब

खॅाटी लखनउ वाला

लिए मन में उंची उंची तमन्ना।



माॅ नहीं कहती

माॅ अब कभी नहीं कहती मुझसे

स्वयं ही लेकर जाती है

खेत में पिता को पानी

मैं देखता हूं केवल

करता रहता हूं मनमानी

जैसे पिता बूढ़े नहीं

माॅ बूढ़ी नहीं

मैं ही बूढ़ा हूं

अपाहिज

जलपा

असहाय

व निरुपाय सा ।












मंगलवार, 6 अक्टूबर 2015

जिंदगी हर किसी की





जिंदगी हर किसी की मिल जाती है कहानी में
वो आदमी भी सिकन्दर था कभी जवानी में

पहचानने से बज्म में इन्कार करता है उसे
खत वो अनगिनत जिसकी छुपा रखा है सिरानी में

कोई समझे कहाॅ दिल की हालात-ए-रंग क्या क्या है
जाकर देख ले हर साख को उजड़़े हुए बगानी में

मुहब्बत में बड़़े किस्से हुए इस जमीं के हर शहर में
डूबकर भी मर गए कुछ आॅख की पानी में

लवण्डर से महकते उसके लिबास भी खूब होंगे
मैं गम लिए बैठा हूं उसके इश्क़ की निशानी में

हर शख़्स है चित्रों में किरदार अपना ढूढ़ता फिरता
मैं प्रेम का प्यासा अभी खोया हुआ कबीरा की बानी में

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2015

शरीफ विदेशों में जाकर ऐसे बात करते हैं जैसे किसी किराना के दूकानदार से बात कर रहें हों। मोदी बड़े ऊंचे लोगों से मिलते हैं ,दुनिया के उन लोगों से मिलते हैं बराबरी के आदरपूर्ण स्तर पर जिनसे मिलकर हिन्दुस्तान की तकदीर संवर रही है। मोदी वक्त की नज़ाकत को पहचानते हैं। लेकिन शरीफ वाही घिसा पिटा राग कश्मीर ही अलाप रहे हैं।


घटना एक ,कौण अनेक : हमारा मानना है आदमी के साथ कितना भी बुरा से बुरा हो जाए बस उसका दिमाग "आज़मी "न हो

घटना एक ,कौण  अनेक :  हमारा मानना है आदमी के साथ कितना भी बुरा से बुरा हो जाए बस उसका दिमाग "आज़मी "न हो जिन्हें पड़ोसी पाकिस्तान के पत्रकारों के ये स्वर सुनाई नहीं देते :शरीफ विदेशों में जाकर ऐसे बात करते हैं जैसे किसी किराना के दूकानदार से बात कर रहें हों।

मोदी बड़े ऊंचे लोगों से मिलते हैं ,दुनिया के उन लोगों से मिलते हैं बराबरी के आदरपूर्ण स्तर पर जिनसे मिलकर हिन्दुस्तान की तकदीर संवर रही है। मोदी वक्त की नज़ाकत को पहचानते हैं। लेकिन शरीफ वाही घिसा पिटा राग कश्मीर ही अलाप रहे हैं।

पाकिस्तान पत्रकार भी वक्त की नज़ाकत को पहचानते हैं लेकिन मुलायम अली उर्फ़ नेताजी के पुत्र अखिलेशयादव  के मंत्रिमंडल में शामिल आज़मी विचार के लोग ये सब न सुनना चाहते हैं न देखना। मोदी की  इनके दिमाग में इतनी दहशत है कि कहीं किसी पेड़ से गिरकर चिड़िया का अंडा भी फुट जाए ये उसमें मोदी का हाथ देखते हैं।

एक पत्रकारा भी इधर कुछ ऐसा ही राग अलाप रहीं हैं दादरी की एक दुखद  घटना पर-उन्हें नेहरू के इशारे पर लिखवाया इतिहास इतिहास दिखलाई देता है।

एक रक्त रंगी लेफ्टीया इतिहासकारा उर्मिला थापर उनकी नज़र में आलमी इतिहासकार हैं वाह री पत्रकारा -नाम नंदिनी कृष्णन और काम -सेकुलरों का झंडा उठाना।


दंगा कराने की सेकुलर साजिश

दंगा कराने की सेकुलर साजिश :दादरीघटना  की दिशा च्युत जांच

पश्चिमी उत्तर प्रदेश के एक नगर दादरी (मायावती ख्याति का नगर )को इन दिनों सेकुलर साजिशखोर निशाने पे लिए हुए हैं। यहां कुछ सेकुलर तत्व एक व्यक्ति को अपने जाल में फंसाकर नित्य उस से गो हत्या  करवाते थे। इसने गो के कटे फटे अंग एक  मंदिर के सामने भी डालने शुरू कर दिए। गो के अंदर भारतधर्मी समाज ३३ करोड़ देवताओं का वास मानता है। मंदिर के उस पुजारी से इन सेकुलर वीरों ने पहले तो बयान जारी करवाया कि मंदिर के आसपास का परिवेश आये दिन दूषित करवाया जा रहा है जिससे भारतधर्मी समाज परेशान है। जब जन उन्माद में वह गो हत्यारा मारा गया तब ये सेकुलर तत्व और इनका सेकुलर मीडिया उसी पुजारी को कसूरवार ठहरा रहा है।

इनसे पूछिए भारत धर्मी समाज का कोई आदमी यदि कुरआन शरीफ का नाम लेकर आसमान की ओर थूक दे (हालांकि वह थूक उसी के मुंह पे आकर पड़ेगी )तब क्या कुरआन में आस्था रखने वाला समाज भड़केगा नहीं। जांच इस बात की होनी चाहिए ये गौ हत्या करवाने वाले तत्व कौन से थे। अखिलेश की पुलिस पुजारी के पीछे क्यों पड़ी है।

जांच की दिशा तो यह होती भारतधर्मी समाज की भावनाओं को आहत करके उन्माद फैलाने वालों की खबर ली जाती। लेकिन उत्तरप्रदेश सरकार के कई आजम फाज़म  इस एकल हत्या की आड़ में दंगे भड़काना चाहते हैं।

ऐसा करके ये बिहार के महाठगबंधन  को क्या संकेत भेजना चाहते हैं ?और वह हिंदुत्व की चौड़ी  लाल बिंदी लगाकर हिंदुत्व को ही अपमानित करने वाली विदूषी और योग की मुद्राओं को कुत्ते की मुद्रा कहने वाला फ़ीताराम कुतेश्री क्या कहना चाहता है। सारे ओवैसी आज़म भांडसेकुलर मीडिया के साथ जो नौटंकी कर रहें हैं उसे जनता निशाने पे ले चुकी हैं। इन रक्तरंगी लेफ्टीयों ,कांग्रेस में मौजूद सेकुलर जेहादियों का अब जब कोई नाम लेवा नहीं रह गया है ये दादरी के बहाने देश भर में जातीय उन्माद फैलाना चाहते हैं।
सेकुलर लालउद्दीन सरे आम जातीय और मजहबी वोट मांगने की बेशर्मी पे उतर  आया है। अखिलेश यादव अपने उत्तर प्रदेश को संभाले अपने मंत्रियों आज़म फाज़ाम को काबू में रखे ,सात समुन्दर पार जा चुकी मोदी लहर  को इस चुतियापे से कोई आंच न आएगी और बल ही मिलेगा -मेरे भाई ये देवनागरी में समझ लो।  

संदर्भ -सामिग्री :उल्लेखित लिंक्स और समाचार डाट काम के सौजन्य से प्रकाशित खबरें ,पाकिस्तान अखबार दी नेशन के मोदी -बनाम शरीफ विषयक उदगार  .

Dadri lynching: India should hang its head in shame-By Nandini krishnan(Sifi)

http://publication.samachar.com/topstorytopmast.php?sify_url=http://navbharattimes.indiatimes.com/state/uttar-pradesh/others/Dadri-lynching-an-accident-dont-give-it-a-communal-twist-Union-Minister-Mahesh-Sharma/articleshow/49183261.cms

'भाजपा यूपी में 2017 से पहले खून खराबा कराना चाहती है'

l'भाजपा यूपी में 2017 से पहले खून खराबा कराना चाहती है'


लखनऊ। उत्तर प्रदेश के दादरी में बीफ खाने के शक के चलते अखलाख की हत्या के बाद इस मुद्दे पर सियासत शुरु हो गयी है। सपा नेता आजम खां ने कहा कि भाजपा सरकार देश में एक बार फिर खून खराबा कराना चाहती है। आजम के विवादित बोल, मुसलमानों के घर पिल्ले जन्म नहीं लेते

मुसलमानों की आबादी को लेकर योगी आदित्यनाथ करा रहे हैं पोल आजम खां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके उपर से अभी तक गुजरात दंगों के दाग छूटे नहीं है। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि वह अपने कार्यकर्ताओं को यूपी में दंगा फैलान से रोके।

मुसलमानों की आबादी को लेकर योगी आदित्यनाथ करा रहे हैं पोल आजम खां ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके ऊपर से अभी तक गुजरात दंगों के दाग छूटे नहीं है। मैं उनसे कहना चाहता हूं कि वह अपने कार्यकर्ताओं को यूपी में दंगा फैलान से रोके।


दादरी में मर्डर: केंद्र ने मांगी रिपोर्ट, 


अखलाक की फैमिली को फिर हमले का डर


गाजियाबाद: यूपी के दादरी में बीफ खाने की अफवाह पर एक शख्स की पीट-पीटकर हत्या के मामले में केंद्र ने यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है। उधर, बिसाड़ा गांव में दहशत का माहौल है। भीड़ के हमले में जान गंवा चुके अखलाक के परिवार और उसकी कम्युनिटी के दूसरे परिवार गुरुवार को गांव छोड़कर जाने की तैयारी में थे। लेकिन डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के भरोसा दिलाए जाने के बाद उन्होंने फिलहाल गांव में ही रहने का फैसला किया है। एक मीडिया रिपोर्ट में ऐसा दावा किया गया है। बता दें कि इस गांव की आबादी 14 हजार है। माइनॉरिटी कम्युनिटी के 50 परिवार यहां रहते हैं। अखलाक की मां कहना है कि हम डर के साये में जी रहे हैं। हम पर कभी भी हमला हो सकता है।
दादरी के इस गांव में इसी सोमवार अखलाक नाम के शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। उसके बेटे को अधमरा कर दिया गया। इससे पहले, गांव में अफवाह फैल गई कि उसका परिवार घर में न केवल बीफ स्टोर करके रखता है, बल्कि खाता भी है।(पूरा मामला जानने के लिए यहां क्लिक करें)
'हो सकते हैं और हमले'
अखलाक की मां असगारी ने कहा, ''मेरे बेटे की हत्या कर दी गई। मेरा पोता जिंदगी की जंग लड़ रहा है। पुलिस हमें कुछ वक्त के लिए सुरक्षा दे रही है। लेकिन हम गांव में स्थायी तौर पर नहीं रह सकते। हमें डर है कि इस तरह के और हमले हो सकते हैं। हमें अपनी रिश्तेदारों के संपर्क में हैं और गांव छोड़ने की तैयारी में हैं।'' गांव के ही इलियास ने कहा, ''यह गांव हमारा घर है। हम ज्यादा दिन डर में नहीं जी सकते। बहुत सारे परिवार पहले ही गांव छोड़कर जा चुके हैं। बुधवार सुबह हमने भी गांव छोड़ने का सोचा था। आने वाले दिन में यहां शांति कायम होने की बहुत कम गुंजाइश है।''
'किसका खून नहीं खौलेगा?' 
बीजेपी की वेस्टर्न यूपी यूनिट के वाइस प्रेसिडेंट श्रीचंद शर्मा ने एक अंग्रेजी अखबार से बातचीत में कहा, ''उस शख्स (अखलाक) की मौत चोटों की वजह से नहीं, बल्कि सदमे से हुई। किसी ने उसे बता दिया कि उसके बेटे की मौत हो गई। ऐसा तो हर दिन होता है। जब किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचाते हैं, तो इस तरह की टकराहट होती है। यह सांप्रदायिक दंगे का मामला नहीं है। हिंदू समुदाय गाय की पूजा करता है। गोवध देखकर किसका खून नहीं खौलेगा?''
'यह ठाकुरों का गांव, करने से पहले सोचना चाहिए था'
दादरी के पूर्व बीजेपी एमएलए नवाब सिंह नागर ने कहा, ''अगर गोवध और गाय का मांस खाना साबित हो जाता है तो शर्तिया तौर पर पीड़ित परिवार की गलती है। अगर उन्होंने गोमांस खाया है तो वे भी जिम्मेदार हैं। उन्हें यह सोचना चाहिए था कि इसकी प्रतिक्रिया क्या होगी। गोवध पर बैन है और यह मामला हिंदुओं की भावनाओं से जुड़ा हुआ है। स्वाभाविक है कि ऐसी घटनाओं से लोगों का गुस्सा भड़केगा और सांप्रदायिक तनाव भी। यह ठाकुरों का गांव है और उन्होंने बेहद उग्र तरीके से अपनी भावनाएं जाहिर की हैं।''
'गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हो'
बीजेपी नेता शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रशासन एक समुदाय विशेष के प्रति पक्षपातपूर्ण रवैया अपना रहा है। शर्मा ने कहा, ''हमें पता चला है कि इस मामले में धारा 302 (हत्या) और 307 (हत्या की कोशिश) के तहत मामला दर्ज किया गया है। लेकिन यह सुनियोजित मर्डर नहीं था। मारपीट में एक शख्स की मौत हुई है। पुलिस को धारा 304 (गैर इरादतन हत्या) का मामला दर्ज करना चाहिए था।''
'महापंचायत बुलाएंगे, लोगों को इकट्ठा करेंगे'
शर्मा ने कहा, ''सारा मामला कथित गोहत्या की वजह से हुआ। इस मामले में एक एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। गांव में गिरफ्तारियों को लेकर डर फैल गया है। जब तक जिला प्रशासन, डीएम और दूसरे अधिकारी बैठकर हमारी मांगें नहीं सुनते, हम अपने एजेंडे के साथ आगे बढ़ते रहेंगे। हमने 11 अक्टूबर को बिसारा में महापंचायत बुलाने का फैसला किया है। शुक्रवार से हर गांव-गांव जाएंगे और लोगों को इकट्ठा करेंगे। हम उत्पीड़न बर्दाश्त नहीं करेंगे।''
गांव में पहुंची बीजेपी-बीएसपी, सपा ने बनाई दूरी 
बीजेपी और बीएसपी के नेता बुधवार को गांव में पहुंचे। उन्होंने पीड़ितों के अलावा आरोपियों के घरवालों से मुलाकात की। वहीं, सत्ताधारी समाजवादी पार्टी के नेता नहीं पहुंचे। प्रदेश के कैबिनेट मंत्री आजम खान ने पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। आजम ने कहा, ''क्या यह पाकिस्तान न जाने की सजा है? पीएम को अपने कार्यकर्ताओं को रोकना चाहिए।'' (आजम ने और क्या कहा, जानने के लिए यहां क्लिक करें)

गुरुवार, 1 अक्टूबर 2015

बेहतर यही है वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का हिन्दुस्तानी नाम बदलकर जमालुद्दीन लालउद्दीन विश्वविद्यालय कर लें





Shekhar Gemini

जेएनयू से फेसबुक का बहिष्कार करने की अपील करने वालों से दो टूक :


ये आवाज़ जिन मुखों से निकली है या तो वे मार्क्सवाद के बौद्धिक गुलाम हैं या फिर जेहादवादी मानिसकता के पक्षधर हैं। भारत के सम्मान को बढ़ाने वाली कोई भी आवाज़ या घटना ,सिलसिला ,सूचना उन्हें सहन ही नहीं होता  . बेहतर यही है वे जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय का हिन्दुस्तानी नाम बदलकर जमालुद्दीन लालउद्दीन विश्वविद्यालय कर लें। उन्हें शर्म नहीं आती कि वे हिन्दुस्तानी नाम के एक विश्वविद्यालय में पढ़ते हैं। भारतवासियों को ये  भूलना नहीं चाहिए कि ये वही लोग हैं जो पिछले कई दिनों से फिल्म इंस्टीट्यूट पुणे में तमाशा कर रहे थे। 

फेसबुक के संस्‍थापक मार्क जुकरबर्ग ने हिंदुस्‍तान में आकर हिंदू मंदिर से सकारात्‍मक ऊर्जा लेने की बात क्‍या कही, पूरी दुनिया ही उन पर टूट पड़ी. क्‍या इस्‍लामी, क्‍या इसायत और क्‍या सेक्‍यूलरवादी??- सभी का वह बंधा नारा खुल गया, जिसमें यह झूठ लपेट रखा था कि ''सभी धर्म एक ही शिक्षा देते हैं, सभी धर्म समान हैं''- वगैरह, वगैरह.....
मार्क पर हमला तो PMO India मोदी के नाम पर किया जा रहा है, लेकिन इन नफरत फैलाने वालों की असली टीस मार्क द्वारा भारत के मंदिरों में सकारात्‍मक ऊर्जा होने की बात कहने को लेकर ही है....
''अलायंस फ़ॉर जस्टिस एंड अकाउंटबिलटी'' नामक एक वर्ग को दुनिया भर के मक्‍कारों ने आगे किया है और एक वेबसाइट लॉन्च किया, जिसका नाम-'ज़क, वॉश योर हैंड्स' है. अर्थात जकरबर्ग अपने हाथ साफ करो, क्‍योंकि तुमने भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से हाथ जो मिलाया है. मार्क को हाथ धोने के लिए हजारों बोतल सैनेटाइज़र भेजे जा रहे हैं, जिस पर गुजरात दंगे में मरे लोगों का नाम चिपका कर भेजा जा रहा है. सैनेटाइज़र भेजने वालों में खून से नहाए आईएसआईएसआई का डीएनए शायद पनप रहा है, क्‍योंकि नफरत का यह आईएसआईएस मार्का सॉफ्ट रूप ही है....
ब्रिटेन का बीबीसी इसका अगुवा है और @DocVatsa, @vinaydokani @MECHASHISH- जैसे चंद नफरत की पैदाइश की सोच को अंतरराष्‍ट्रीय मुहिम बनाने में जुटा है. फर्क नहीं पड़ता, क्‍योंकि सनातन इससे ही अहिंसा और प्रेम की राह बनाता आया है और तब तक बनाता रहेगा, जब तक इस दुनिया में एक भी नफरत करने वाले लोग हैं.....
वैसे जिस गुजरात दंगे के नाम पर मोदी पर यह हमला किया जा रहा है, उस पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय कब का आ चुका है। लेकिन इन घृणित मानसिकता के लोगों को न तो याकूब मेनन पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मान्‍य था और न ही गुजरात दंगे पर ही सुप्रीम कोर्ट का निर्णय मान्‍य है.....
दोष कहीं न कहीं राष्‍ट्रवादी संस्‍थाओं एवं उनपार्टियों का भी है, जो बकलोलों की तरह इन मार्क्‍स-मसीह-मोहम्‍मदवादी विचारधारा के टीवी चैनलों पर टकटकी लगाए बौराए से बक-बक करते या देखते रहते है इन्‍होंने अपनी तरफ से न तो आम लोगों तक सही तथ्‍य पहुंचने का कभी प्रयास ही किया और न ही किसी ऐसे प्रयास को सपोर्ट ही किया......
'मोदी से मिले हैं तो हाथ साफ़ कर लीजिए' http://www.bbc.com/…/09/150929_zuckerberg_modi_sanitizer_pkp
सौजन्य से - Sandeep Deo

Shekhar Gemini की फ़ोटो.
  • Maitreyee Yagyavalkya और 8 अन्य लोगों को यह पसंद है.
  • टिप्पणियाँ
      • Virendra Sharma हर तरफ एतराज होता है ,मैं जहां रौशनी में आता हूँ 

        सावन के अंधों को हरा हरा ही नज़र आता है यही सेकुलर चरित्र है।

      • Virendra Sharma हर तरफ एतराज होता है ,मैं जहां रौशनी में आता हूँ 

        सावन के अंधों को हरा हरा ही नज़र आता है यही सेकुलर चरित्र है। 

        श्रावण आता देख कर कोयल साधो मौन ,

        अब दादुर वक्ता भये ,तोकू पूछे कौन।

बुधवार, 30 सितंबर 2015

सिहिर सिहिर हवाएं




सांझ के बाद
हम निकले घूमने खेत ,
चाॅद खिलकर
चाॅदनी बिखेरता,
तारे फलक पर
टिमटिमाटे हुए ,
लहलहाती धान की फसल,
चारो ओर धानी वातावरण ,
झिंगुर की अनवरत आवाजें,
कूदते फांदते हुए
मेंढकों का ट्र्र्ट्र्र्,
और उस समय को
मनभावन बनाती हुई,
मधुर झोंको के साथ
बह रही सिहिर सिहिर हवााएं।

भारतीय राजनीति की आज की हेलन


भारतीय राजनीति की आज की हेलन


Sanjay Dwivedy की फ़ोटो.
Sanjay Dwivedy
आजकल एक टीवी सीरियल आ रहा है 'अशोका', काफ़ी अच्छा धारावाहिक है जिसमे चंद्रगुप्त का पौत्र एवं बिंदुसार का पुत्र, अशोक के जीवन का चरित्र चित्रण किया गया है।
अशोक की माता धर्मा एक धर्मपरायण और कर्तव्यनिषठ ब्राह्मण स्त्री है, जो अशोक को आदर्श, सही ग़लत, न्याय- अन्याय का बोध कराते हुए कर्तव्य के पथ पर चलने की प्रेरणा देती रहती है। उस समय भी यूनानी और खुरासनी पूरी साज़िशें करते हैं सीधे साधे भारत पुत्र अशोक के खिलाफ। इसमें एक राजमाता हेलेना का चरित्र है जो यूनानी है और चंद्रगुप्त से विवाह के पश्चात्, जो रानी बनी और बाद में जिन्हें राजमाता का दर्जा मिला है और अपनी पूरी जीवन मगध में गुज़ारने के बावजूद मगध को कभी दिल से नहीं अपना सकी और इसके खिलाफ साजिशे ही करती रहतीं हैं। इनके मन में एक सपना है िक अपने पुत्र को मगध के सिंहासन पर देखना चाहती हैं। इरादे इतने ख़तरनाक कि अपना मक़सद प्राप्त करने के लिये, अपने पुत्र की गर्दन भी काट सकती है। इनकी साज़िशों की थाह किसी भी आम इंसान को नहीं मिलती, सिर्फ़ चाणकय के अलावा, जो कि चतुर राजनैतिज्ञ एवं दूरदर्शी था, जो मौर्य वंश का संस्थापक और सरंक्षक भी था और जिसकी प्रखर बुद्धि एवं विद्वता की वजह से ही मगध सुरक्षित रह पाया वरना बहुत पहले ही इनकी साज़िशों का शिकार हो गया होता ।
बात चाहे दो हज़ार वर्ष पुरानी हो या अभी हो ज़्यादा कुछ नहीं बदला है। आज भी हमारे पास एक यूनानी हैं, सोनिया जो कि माफ़िया के जन्मदाता देश एवं पोप का आशीर्वाद लेकर इटली से आई हैं। राजीव गांधी से विवाह के पश्चात इस देश की कहने के लिये रानी तो नहीं, पर इससे कम भी नहीं और आजकल राजमाता हैसियत रखती हैं, जो कि देश पर सबसे ज़्यादा सालों तक शासन करने वाली पार्टी की अध्यक्षा है और जो देश की सबसे ज़्यादा पावरफुल महिला है लेकिन वो इस देश को कभी दिल से अपना नहीं पाई और इसे जमकर लूटने के अलावा कुछ नहीं किया। इनके मन में भी अपने निकम्मे और कमअक्ल पुत्र को किसी भी तरह से देश की सत्ता के सर्वोच्च शिखर पर देखना चाहती है जिसके लिये किसी भी हद तक जा सकती है, पर इस बार हमारे पास कोइ चाणक्य नहीं है। ध्यान से देखिये और फिर सोचिये क्या आपको रानी हेलेना में सोनिया की झलक नहीं दिखाई देती...

एक प्रतिक्रिया उक्त पोस्ट पर :

वर्तमान हेलन(सेलुकस की बेटी ) की साजिशें किसी से छिपी नहीं हैं। दो हज़ार वर्ष पहले की हेलन तो कुछ समझदार थी पर वर्तमान हेलन बौद्धिक दृष्टि से पूरी दिवालिया  है,उसका पुत्र इस दिवालयेपन में अपनी हेलन माँ से  चार कदम और आगे है। समझ से बाहर की बात तो ये है ,डॉ.करण सिंह सरीखे भारतीय दर्शन के उद्भट विद्वान होते हुए भी इस हैलन  के मातहत काम कैसे कर रहें हैं।

भारत में चाणक्य बुद्धि के एक और महानुभाव हैं,जो पंडित नेहरू से लेकर उस वंश की सारी कहानी अच्छी तरह जानते हैं। वो हेलन और उस के बेटे को भी ब-खूबी समझते हैं और उनका नाम है श्री सुब्रामनियम स्वामी।

भारतीय राजनीति की आज की हेलन   

प्रखर राष्ट्रवादी नरेंद्र दामोदर मोदी भारतधर्मी समाज का नेतृत्व चाणक्य बुद्धि से ही कर रहें हैं।