शीतलता बढ़ गई पवन में।
कुहरा छाया नील गगन में।। |
चारों ओर अन्धेरा छाया, सूरज नभ में है शर्माया, पंछी बैठे ठिठुर रहे हैं, देख रहे हैं घर-आँगन में।
कुहरा छाया नील गगन में।।
|
वाहन की गति हुई मन्द है, चहल-पहल हो गई बन्द है, शीतल धुआँ नजर आता है, ऊनी कपड़े लदे बदन में।
कुहरा छाया नील गगन में।।
|