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बुधवार, 27 नवंबर 2013

श्याम स्मृति ..... प्रेम व्यक्ति के वश में नहीं, प्रेम में भावुकता एवं प्रेम विवाह .....डा श्याम गुप्त....



                                                     श्याम स्मृति 

              प्रेम  व्यक्ति के वश में नहीं , प्रेम में भावुकता  एवं प्रेम विवाह .....
  
                 प्रेम होना या करना एक अलग बात है वह व्यक्ति के वश में नहीं है    परिस्थितियाँ ही नियति बनकर व्यक्ति को भवितव्य की ओर धकेलती हैं तथा भविष्य तय करती हैं।  हाँ, व्यक्ति की स्वयं की दृड़ता जो आदर्शों, विचारों, कुल समाज की स्थिति से बनती है इसमें बहुत प्रभाव डालती है अपने प्यार को प्राप्त कर लेनाप्रेमी से प्रेम-विवाह  एक सौभाग्य की बात है    परन्तु एक अन्य पक्ष यह भी है कि प्रेम को भौतिक रूप में पा लेना या प्रेम विवाह कोई  इतना महत्वपूर्ण आवश्यक भी नहीं है कि उसके लिए संसार में सब कुछ त्यागा जाय    यह इतनी बड़ी उपलब्धि भी नहीं है कि प्राण त्यागने को भी प्रस्तुत रहा जाय, जो ईश्वरीय देन है   क्योंकि-  ' आत्म एव यह जगत हैवस्तुतः हम प्रत्येक कार्य सिर्फ स्वयं के लिए ही करते हैं   परमार्थ में भी आत्म-सुख का भाव छुपा रहता है   सभी बंधन, सहयोग भी आत्मार्थ से ही जुड़े रहते हैं।  हम देंगे तभी मिलेगा भी  आत्मार्थ भाव ही है   अतः सिर्फ प्रेम-विवाह की जिद में सारा केरियर, सांसारिक सम्बन्ध यहाँ तक कि जीवन भी खोना पड़ता है तो शायद यह बहुत अधिक मूल्य है   संसार में ऐसी कौन सी प्रेम-कथा है जो इस तरह के सम्बन्ध में परिणत होकर उन्नत शिखर पर पहुँची होया जो सुखान्त हो  एवं  जिससे देश समाज या व्यक्ति स्वयं उन्नत हुआ हो
 
              प्रायः कहा जाता है कि महिलायें भावुक होती हैं   परन्तु यह सर्वदा सत्य नहीं है वैदिक विज्ञान के अनुसार . पराशक्ति -पुरुष सिर्फ भाव रूप में शरीर या किसी पदार्थ में प्रविष्ट होता है जबकि अपरा-शक्ति नारी, प्रकृति, माया, शक्ति या ऊर्जा रूप है जो पदार्थों   शरीर  के भौतिक रूप का निर्माण करती है अतः पुरुष भाव-रूप होने से अधिक भावुक होते हैं, स्त्रियाँ इसका लाभ उठा पाती हैं