दोस्तो की भीड़ मे भी एक दोस्त की तलाश है मुझे
अपनो की भीड़ मे भी एक अपने की प्यास है मुझे,
छोड आता है हर कोइ समन्दर के बीच मुझे,
लडना और जीतना चाहता हूँ इन अन्धेरो के गमो से,
अब तो बस एक शमा के उजाले की तलाश है मुझे,
अपनी हर ज़िन्दगी में तंग आ चुका हूँ इस बेवक्त की मौत से मै,
अब अपनी इस ज़िन्दगी में एक हसीन ज़िन्द्गी की तलाश है मुझे,
क्या पागल और दीवाना हूँ मै, सब यही कह कर सताते है मुझे,
सादर स्नेह सहित,
आपका स्नेहाकांक्षी दोस्त
--ललित चाहार--