“ श्रीमान जी की तारीफ में --पथिकअनजाना -468 वीं पोस्ट”
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गर चन्द लफ्जात श्रीमान की
तारीफ में कर दें बयान आप
दुनिया में हर मौके पर इससे बेहत्तर
तोहफा क्या होगा
माना यहाँ बिना किसी प्रतिफल,आशा के
कोई कुछ न देता
कुछ चाहने से पहले सोचें कितने ऐसे
तोहफे आपने दिये हैं
न करें बयाँ हकीकत कही, वर्ना नजरों
से सबकी गिर जावेंगें
ध्यान अगले वक्त के लिये करे कैसी
कहानी आप दे जायेगे
परवाह नही कहे जमाना गर सुबह का भूला
शाम घर आना
बात पते की दे रहा हू यारों मिले सकून
गर तुम अजमाना
किसी महफिल में कभी याद करेगे,कह गया
पथिकअनजाना
पथिक अनजाना