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गुरुवार, 17 दिसंबर 2015

वो सामने मेरे ...........




वो सामने मेरे नजर मुझको नहीं आता
जब भी मिला दरिया मिला सागर नहीं आता
 
उसे देखा नहीं लेकिन दिल में रहा तो था
सफर में कहीं वो मील का पत्थर नहीं आता
 
सुनता हूॅ खुदा मेरा फलक पर है जमाने से
वह क्यों मेरे सामने उतरकर नहीं आता
 
ऐ आदमी इस जहाॅ में खून न कर अब
पता है आदमी फिर कभी मरकर नहीं आता
 
जो औरों को दीये फिरते तोअफा भलाई का
कालीन मिलते हैं कभी कंकड़़ नहीं आता
 
मंजिल के तरफ तू खुद चल मेरे साथी
मुकद्दर है, मुकद्दर किसी के घर नहीं आता


बुधवार, 16 दिसंबर 2015

चन्द माहिया : क़िस्त 25


:1:
टूटा जो खिलौना है
ये तो होना था
किस बात का रोना है

:2:
नाशाद है खिल कर भी
प्यासी है नदिया
सागर से मिल कर भी

:3:
कुछ दर्द दबा रखना
आँसू हैं मोती
पलको में छुपा रखना

:4:
इतना तो बता देते
क्या थी ख़ता मेरी
फिर चाहे सजा देते

:5:
बस हाथ मिलाते हो
आसाँ है ,लेकिन
रिश्ता न निभाते हो

-आनन्द.पाठक-
09413395592

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

चन्द माहिया :क़िस्त 24

माहिया :  क़िस्त 24

:1:

ये इश्क़,ये कूच-ए-दिल
दिखने में आसाँ
जीना ही बहुत मुश्किल

:2:

दिल क्या चाहे जानो
मैं न बुरा मानू
तुम भी न बुरा मानो

  :3:
सच कितना हसीं हो तुम
चाँद किधर देखूं
ख़ुद माहजबीं हो तुम

:4:
जाड़े की धूप सी तुम
मखमली छुवन सी
लगती हो रूपसी तुम

:5:
फिर लौट गया बादल
बिन बरसे घर से
भींगा न मिरा आंचल

-आनन्द पाठक
09413395592

रविवार, 6 दिसंबर 2015

चन्द माहिया ;क़िस्त 23

चन्द माहिया : क़िस्त 23
:1:
रिश्तों की तिजारत में
ढूँढ रहे हो क्या
नौ फ़स्ल-ए-रवायत में

:2:

कुछ ख़ास नहीं बदला
छोड़ गई जब से
अब तक हूँ नहीं सँभला

:3:
ये ख़ून बहा किसका
मैं क्या जानू रे !
कुर्सी से रहा चिपका

:4:
अच्छा न बुरा जाना
दिल ने कहा जो भी
बस वो ही सही माना

:5:
वो आग लगाते है
अपना भी ईमां
हम आग बुझाते हैं

-आनन्द.पाठक-
09413395592

गुरुवार, 26 नवंबर 2015

गीत "ये धरा राम का धाम है" (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)


रम रहा सब जगह राम है।
ये धरा राम का धाम है।।

सच्चा-सच्चा लगे,
सबसे अच्छा लगे,
कितना प्यारा प्रभू नाम है।
ये धरा राम का धाम है।।

नाम जप लो अभी,
राम भज लो सभी,
लगता कोई नहीं दाम है।
ये धरा राम का धाम है।।

वो खुदा-ईश्वर,
सबको देता है वर,
वो ही रहमान है श्याम है।
ये धरा राम का धाम है।।

वो अजर है अमर,
सब जगह उसका घर,
सबके करता सफल काम है।
ये धरा राम का धाम है।।

बुधवार, 25 नवंबर 2015

हास्य कलाकार अभय सिंह ‘बंटू’ ने टीवी शो ‘चिड़ियाघर’ में इंट्री मारी

उत्तर प्रदेश का प्रतापगढ़ जिला किसी से पहचान का मोहताज नहीं है। यहां की प्रतिभाओं ने राजनीति से लेकर अभिनय के क्षेत्र तक अपनी बुलंदी का झंड़ा गाड़ रखा है। प्रतापगढ़ जिले के बिहारगंज भोजपुर निवासी हास्य कलाकार अभय सिंह ‘बंटू’ ने टीवी शो ‘चिड़ियाघर’ में इंट्री मारी है। सब टीवी चैनल पर आने वाले चिड़ियाघर के इस प्रोग्राम में वह मुख्य भूमिका में नजर आएंगें। इस कार्यक्रम की शुरूआत 30 नवम्बर से हो रही है। अभय की इस उपलब्धी से गांव में जश्न का माहौल है। सदर तहसील के बिहारगंज भोजपुर गांव निवासी अभय सिंह ने टीवी सीरियल में लाफ्टर प्रोग्राम से अपने कैरियर की शुरूआत की। हास्य कलाकार अभय ने लाफ्टर प्रोग्राम में अपनी प्रतिभा के माध्यम से लोगों को खूब गुदगुदाया और यह प्रोग्राम काफी चर्चित रहा। इसके बाद अभय ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पिटरशन हिल, लापतागंज, चितौड़ की रानी, सावधान इंडिया सहित कई टीवी सीरियलों में काम किया। इसी बीच सब टीवी पर चिड़ियाघर नाम प्रोग्राम में अभय को काम करने का मौका मिला। यह प्रोग्राम हंसी के हसगुल्ले व कॉमेडी से पूरी तरह भरा हुआ है। इसमें अभय मुख्य किरदार (लीड रोल) की भूमिका में नजर आएगा। चिड़ियाघर प्रोग्राम की लांचिंग 30 नवम्बर को होने जा रहा है। प्रोग्राम सब टीवी पर 30 नवम्बर से रात 9 से 9:30 बजे तक प्रत्येक सोमवार से शुक्रवार तक चलेगा। अभय की इस कामयाबी से परिजनों में खुशी का माहौल है। बातचीत के दौरान अभय सिंह ने बताया कि चिड़ियाघर सीरियल में वह मुख्य भूमिका में नजर आएंगें। उन्होंने सीरियल के कुछ अंश शेयर करते हुए कहा कि इसमें टामी तिवारी हीरो की भूमिका मुझे मिली है। इसमें वह करोड़पति परिवार से है। टामी तिवारी एक तितली पांडेय नामक लड़की को पंसद करता है, लेकिन वह उससे अपने प्यार का इजहार नहीं कर पाता, क्योंकि उसे प्यार का मतलब और उस लड़की को उसे अपना बनाने का तरीका नहीं मालूम है। ऐसे में उसे लड़की से मिलाने में उसका दोस्त पप्पी पांडेय उसका साथ देता है और उसे अपने पास लाने तरीका बताता है।



रविवार, 22 नवंबर 2015

मुलायम का आधुनिक ‘समाजवाद’

‘समाजवाद’ और ‘पूंजीवाद’ दोनों शब्दों के बीच पारस्परिक अन्तर्द्वन्द है। ‘समाजवाद’ में जहां समाज, संस्कृति, परम्परा और आम आदमी की बात झलकती है वहीं ‘पूंजीवाद’ में इसके ठीक विपरीत की क्रियाओं का आभास हुआ करता है। यूं तो ‘समाजवाद’ शब्द त्रेतायुग से प्रचलित है। भगवान राम का अभिमानी रावण के खिलाफ संघर्ष ‘समाजवाद’ का ही द्योतक माना गया। भगवान श्रीकृष्ण का कंस के आमनुषिक शासन के विरुद्ध छेड़ा गया अभियान भी ‘समाजवाद’ का रूप है। अगर यह ‘समाजवाद’ अपने स्वरुप को बदलकर ‘पूंजीवाद’ में परिवर्तित हो जाय और उसका आचरण करने वाले खुद को समाजवादी बोलें तो उसे एक नया नाम आधुनिक ‘समाजवाद’ दिया जा सकता है। 21 नवंबर 2015 की रात उत्तर प्रदेश के सैफई गांव में समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव के 77वें जन्मदिन समारोह में जो देखने को मिला उसे देखकर मैने इसे मुलायम का आधुनिक ‘समाजवाद’ नाम देने की कोशिश की है। समाजवादी पार्टी के मुखिया खुद को डॉ. राम मनोहर लाहिया का अनुयायी बताते हैं। वह उनके समाजवादी विचारों से प्रभावित हैं। ऐसा लगता है कि आने वाले समय में डॉ. लोहिया का समाजवाद न अपनाकर मुलायम सिंह यादव के अनुयायी मुलायम के आधुनिक ‘समाजवाद’ की परंपराओं का अनुपालन करेंगे। बर्थडे केक काटने से पहले मुलायम सिंह यादव ने यह कहकर रही बात पूरी कर दी कि ‘समाजवाद का मतलब भूखा नंगा, नहीं बल्कि संपन्नता है।’ सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन किसी महापर्व से कम नही था। चारों ओर सुबह से रात तक जश्न का माहौल दिखाई दिया। गांव की सभी इमारतें बिजली की रंग-बिरंगी रोशनी के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के फूलों से सजाई गई थीं।  सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव का पैतृक आवास भी फूलों व बिजली की लाइटों से सजाया गया था और मुख्य सड़क से लेकर उनके घर तक तोरणद्वार भी बनाये गये थे। शाम के समय बिजली की रंग-बिरंगी सजावट बाहर से आने वाले मेहमानों के लिए काफी आकर्षण का केन्द्र रही। जिस तरह से सपा मुखिया के जन्मदिन पर जो ऐतिहासिक कार्यक्रम आयोजित किया गया था उसे देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा था कि मानो दीपावली का त्योहार फिर से आ गया हो। मुलायम सिंह यादव के इस जन्मदिन समारोह में कितने रुपये फूंके गए। यह रुपए कहां से आये। इस पर बात करना मूर्खता होगी क्योंकि इन सबके अपने-अपने तर्क  हैं। कोई इसे पार्टी के फंड का हिस्सा कहेगा तो कोई इसे खुद मुलायम परिवार की कमाई बताएगा। पर जवाब तो जनता को देना है कि वह किस समाजवादी विचारधारा की पोषक है। डॉ. लोहिया की या फिर मुलायम सिंह यादव के आधुनिक ‘समाजवाद’ की। मुलायम सिंह यादव के जन्मदिन समारोह के लिए सैफई में जो मंच बनाया गया था, उसकी लागत ढाई करोड़ रुपए आयी। इस कार्यक्रम में आये पांच सौ लोगों के लिए आगरा के होटल आईटीसी मुगल की कैटरिंग बुक की गई थी। लंदन से बग्घी मंगवाई गई थी, दस कुंतल फूल मंगाये गए थे। इसके अलावा क्या कुछ हुआ होगा? इसे आप स्वत: समझ सकते हैं। पानी की तरह इस समारोह में फूंके गए पैसे किसके हैं। जरा उत्तर प्रदेश की हालत देखिये। गन्ना किसान रो रहे हैं। नहरों में पानी नहीं मिल रहा है। किसानों की बिजली नहीं मिल पा रही है। पूरे उत्तर प्रदेश में सड़कों की हालत बद से बदतर है। गेहूं की फसल तैयार हुई तो बेमौसम बारिश ने किसानों के सपने तोड़ दिए। दर्जनों की संख्या में किसानों ने मजबूर होकर मौत को गले लगा लिया। धान की फसल सूखे की स्थिति के कारण अच्छी नहीं हो सकी। दंगों का जिक्र क्या करें। मुजफ्फर नगर और दादरी कांड तो सभी जानते हैं। अपराध चरम पर है। आये दिन पुलिस अधिकारी से लेकर आम आदमी तक की हत्या हो रही है। 1.72 लाख शिक्षामित्रों का भविष्य संकट में है। इन सब विपरीत परिस्थितियों के बावजूद सैफई में विलासिता का जश्न हो रहा है। अच्छा होता के इस कार्यक्रम में आरआर रहमान का शो कराने के बजाय प्रदेश भर में स्थानीय कलाकारों का शो करा दिया गया होता। इससे उन्हें ही कुछ पारिश्रमिक मिल जाता। अच्छा होता कि पानी की तरह फूंके गए इस पैसे को मुख्यमंत्री राहत कोष से सहायता मांग रहे फरियादियों को इमदाद दे दी गई होती। प्रतापगढ़ जिले के विकास खंड गौरा के सुरवां मिश्रपुर निवासी विजय यादव के पशुओं को किसी अपराधिक व्यक्ति ने जहर देकर मार डाला था। विजय यादव अपना परिवार चलाने के लिए मोहताज है। इन्हीं पशुओं से वह दूध बेचकर परिवार का भरण पोषण करता था। उसने मुख्यमंत्री से सहायता की फरियाद की थी, पर फरियाद बेकार गई। विजय की ही तरह कई और भी फरियादी है, जिसके ऊपर ‘सरकार’ की नजर नहीं पड़ी। वर्ष 2014 में मुलायम सिंह के करीबी आजम खां ने रामपुर में उनका शाही जन्मदिन मनाया था। इसके बदले में मुलायम सिंह यादव ने उन्हें मौलाना मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय की सौगात दी थी। इसी तरह मुलायम सिंह का समाजवादी परिवार हर साल सैफई महोत्सव के नाम पर अरबों रुपए नाच गाने पर फूंकता है। मुलायम सिंह यादव और उनके परिवार की इस गतिविधि पर किसी को आपत्ति करने का हालाकि किसी को कानूनी अधिकार नहीं है। मेरा भी आशय इस पर किसी प्रकार की आपत्ति करने का नहीं। मेरा आशय सिर्फ इतना है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रुप में अखिलेश यादव का फर्ज सिर्फ अपने पिता का विलासितापूर्ण जन्मदिन मनाने का ही नहीं, बल्कि उन सारे लोगों के पिता के जन्मदिन मनाने का माहौल बनाने की है जो उत्तर प्रदेश में निवास करते हैं। अकेले मुलायम सिंह यादव का जन्मदिन मनाकर वह कुछ महीने, साल तक खुश रह सकते हैं, पर उत्तर प्रदेश के लोगों के दिलों पर राज नहीं कर सकेंगे।