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बुधवार, 13 जनवरी 2016
मंगलवार, 12 जनवरी 2016
चन्द माहिया : क़िस्त 27
चन्द माहिया :क़िस्त 27
:1:
वो शान से चलते हैं
जैसा हो मौसम
ईमान बदलते हैं
:2:
एक आस अभी बाक़ी
तेरे आने की
इक साँस अभी बाक़ी
:3:
इक रंग-ए-क़यामत है
इठला कर चलना
कुछ उनकी आदत है
:4:
गर्दिश में रहे जब हम
दूर खड़ी दुनिया
पर साथ खड़े थे ग़म
:5:
कब एक सा रहता है
सुख-दुख का मौसम
मौसम तो बदलता है
-आनन्द.पाठक-
09413395592
:1:
वो शान से चलते हैं
जैसा हो मौसम
ईमान बदलते हैं
:2:
एक आस अभी बाक़ी
तेरे आने की
इक साँस अभी बाक़ी
:3:
इक रंग-ए-क़यामत है
इठला कर चलना
कुछ उनकी आदत है
:4:
गर्दिश में रहे जब हम
दूर खड़ी दुनिया
पर साथ खड़े थे ग़म
:5:
कब एक सा रहता है
सुख-दुख का मौसम
मौसम तो बदलता है
-आनन्द.पाठक-
09413395592
सोमवार, 11 जनवरी 2016
Laxmirangam: प्राथमिकता...
Laxmirangam: प्राथमिकता...: प्राथमिकता... हाल ही में किसी अखबार में पढ़ा ... बहुत अच्छा लगा... इसलिए मैं इसे अपने ब्लॉग द्वारा साझा कर रहा हूँ... जापान में एक ...
Andhra born. mother toungue Telugu. writing language Hindi. Other languages known - Gujarati, Punjabi, Bengali, English.Published 13 books in Hindi and one in English.
Can manage with Kannada, Tamil, assamese, Marathi .
Published 10 books in Hindi containing Poetry, Short stories, Currect topics, Essays, analysis etc. All are available on www.Amazon.in/books with names Rangraj Iyengar & रंगराज अयंगर
Both my english books are adopeted by FLAME university Pune for MBA (HR) Final year STUDENTS.
शुक्रवार, 8 जनवरी 2016
🌺 अब तक मेरे गीतों को आपने 'कवि-सम्मेलनों' में दिल से सुना, सराहा, और भरपूर प्यार दिया , उसके लिए आपकी बहुत-बहुत आभारी हूँ । अब मेरा# गीत-संग्रह ..#"बूँद-बूँद गंगाजल"..#'अंजुमन प्रकाशन' से प्रकाशित हो चुका है, जिसकी online pre-booking का अंतिम डेढ़ घण्टा बचा है...तो आप booking करवा रहे हैं क्या ....??
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#डॉ.भावना तिवारी /
drbhavanatiwari@gmail.com
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शनिवार, 2 जनवरी 2016
एक ग़ज़ल : अगर आप जीवन में...
अगर आप जीवन में होते न दाखिल
कहाँ ज़िन्दगी थी ,किधर था मैं गाफ़िल
न वो आश्ना है ,न हम आश्ना है
मगर एक रिश्ता अज़ल से है हासिल
नुमाइश नहीं है ,अक़ीदत है दिल की
मुहब्बत है ने’मत .इबादत में शामिल
हज़ारों तरीक़ों से वो आजमाता
खुदा जाने कितने अभी है मराहिल
मसीहा न कोई ,न कोई मुदावा
कहाँ ले के जाऊँ ये टूटा हुआ दिल
जो पूछा कि होतीं क्या उल्फ़त की रस्में
दिया रख गया वो हवा के मुक़ाबिल
इसी फ़िक़्र में उम्र गुज़री है "आनन’
ये दरिया,ये कश्ती ,ये तूफ़ां ,वो साहिल
-आनन्द.पाठक-
09413395592
शब्दार्थ
मराहिल =पड़ाव /ठहराव [ ब0ब0 - मरहला]
आशना =परिचित /जान-पहचान
अज़ल से = अनादि काल से
अक़ीदत = दृढ़ विश्वास
मुदावा =इलाज
पहलगाम यात्रा
गुलमर्ग की सफल और सुखद यात्रा के बाद मैं अपने अगले पड़ाव "पहलगाम" की तरफ निकल पड़ा। पहलगाम यानि चरवाहों का घाटी। समुद्र तल से तक़रीबन ७५००ft की ऊंचाई पर स्थित पहलगाम कश्मीर के खूबसूरत वादियों में एक और खूबसूरत स्थल जो स्वदेशी एवं विदेशी शैलानियों में समान रूप से प्रसिद्ध है। शेषनाग एवं लिद्दर नदी के संगम पर स्थित यह पर्यटन शहर अपने प्राकृतिक खूबसूरती के लिए विख्यात है। दिल्ली में यमुना नदी का प्रदूषित काले रंग का पानी देखने के बाद लिद्दर नदी की हरे रंग का स्वच्छ बहता पानी बेहद ही खूबसूरत लगता है और आपको रोमांचित कर सकता है।
पिकनिक मनाने के लिहाज से पहाड़ों से घिरे और बहते लिद्दर नदी का किनारा से बेहतर कोई और स्थान हो ही नही सकता। पहलगाम में बेहद ही खूबसूरत १८ होल गोल्फ कोर्स, कुछ फुलवारी और लिद्दर नदी में मछली पकड़ने का लुत्फ़ उठाने के सिवा कुछ खास नही मिला। जिन्हें घुड़सवारी करने का शौक है, उनके लिए पोनी सवारी की सुविधा है। एक वक्त था जब पहलगाम हिंदी सिनेमा फिल्माने के लिए एक महत्वपूर्ण स्थल था। परंतु कश्मीर में आतंकवादी गतिविधियाँ बढ़ने की वजह से बॉलीवुड ने वहां शूटिंग बंद कर दिया। हालाँकि अब धीरे-धीरे फिर से कुछ हिंदी सिनेमा की शूटिंग शुरू हुई है। सर्दी के मौसम में तो पहलगाम की पहाडियाँ बर्फ से ढँक जाती है और तापमान -१५ C तक लुढ़क जाता है।
![]() |
| पहलगाम का एक दृश्य |

पहलगाम का एक दृश्य
| पहलगाम का एक दृश्य |
|
| लिद्दर नदी का एक दृश्य |
पहलगाम से तक़रीबन १२km और ऊपर "अरु" नामक स्थान है जहाँ से कोल्हाई ग्लेशियर, कतरनाग, तरसर एवं मर्सर लेक के लिए ट्रैकिंग शुरू होता है। बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग का असर कोल्हाई ग्लेशियर पर भी पड़ा है और अब यह पिघल कर आधे से भी कम रह गया है।

तरसर लेक

मर्सर लेक
पहलगाम से तक़रीबन १५km और ऊपर चढ़ने पर, समुद्र तल से तक़रीबन ९५०० ft की ऊंचाई पर स्थित "चंदनवारी" नामक स्थान है। बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए जा रहे श्रद्धालुओं की यात्रा यहीं से शुरू होती है। पहलगाम से चंदनवारी तक का सफर गाड़ी से तय किया जाता है, परंतु चंदनवारी से आगे सड़क की सुविधा नहीं होने और अत्यधिक चढ़ाई के कारण श्रद्धालुओं को पैदल या पोनी की सवारी लेनी पड़ती है। अमरनाथ गुफा इस स्थान से तक़रीबन ३२ km की दुरी पर है। शेषनाग लेक अमरनाथ गुफा के रास्ते में चंदनवारी से तक़रीबन १२ km दूर समुद्री तल से ११७००ft की ऊंचाई पर स्थित है।
जब मैं चंदनवारी पहुंचा था उसी समय अमरनाथ यात्रा की समाप्ति हुई थी इसलिए वहां सेना, सरकार, गैर-सरकारी संस्थानों एवं निजी व्यक्तियों द्वारा लगाये गए कैम्प्स एवं प्रदान की जानेवाली सुविधाओं को हटाए जाने की प्रक्रिया को देख पाया था। यहीं पर ७-८ ft मोटी ग्लेशियर देखने का अवसर प्राप्त हुआ जो धुप की वजह से धीरे-धीरे पिघल रहा था।
| अमरनाथ यात्री पंजीकरण एवं प्रवेश द्वार |
| अमरनाथ यात्रियों के रुकने के लिए अस्थायी / स्थायी टेंट और हट |
| चंदनबाड़ी में भारतीय सेना का कैंप का एक दृश्य |
| अमरनाथ गुफा की दुरी दर्शाता बोर्ड |
| अमरनाथ गुफा की तरफ जाता सीढ़ी |
| पिघलते हुए ग्लेशियर का एक दृश्य |
| पिघलते हुए ग्लेशियर का एक दृश्य |
चंदनवारी और पहलगाम के अलावा एक और रमणीक स्थल है जो "बेताब वैली" के नाम से मशहूर है। पीर पंजल एवं जंस्कार हिमालय पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित यह घाटी हरे-भरे घास, बर्फ से ढंके पहाड़ों और ऊँचे-ऊँचे देवड़दार के पेड़-पौधों के लिए विख्यात है। इस स्थान का नाम सनी देओल-अमृता सिंह की पहली हिट फिल्म "बेताब" के नाम पर रखा गया जिसकी अधिकांश शूटिंग इसी वादी में हुई थी। इस स्थान पर एक बहुत बड़ी पार्क है जिसके मध्य में लिद्दर नदी बहती है। पार्क में अनेक पेड़-पौधे देखे जा सकते हैं और स्थानीय लोगों के लिए पिकनिक एवं मनोरंजन का एक महत्वपूर्ण स्थान जान पड़ता है।
![]() |
| बेताब वैली का एक दृश्य |
| बेताब वैली |
| बेताब वैली के मध्य से बहता लिद्दर नदी |
| बेताब वैली पार्क से वैली का दृश्य |
| पार्क के अंदर का एक दृश्य |
| पार्क से वैली का दृश्य |
| पार्क से वैली का दृश्य |
| पार्क के अंदर का दृश्य |
| पार्क के अंदर का दृश्य |
| पार्क के अंदर का दृश्य |
| पार्क के अंदर का दृश्य |
| पार्क के अंदर का दृश्य |
| पार्क के अंदर का दृश्य |
| पार्क के मध्य से बहता लिद्दर नदी |
| पार्क के मध्य लिद्दर नदी के किनारे |
| पार्क के मध्य लिद्दर नदी के किनारे |
| पार्क के मध्य लिद्दर नदी के किनारे |
| मुख्य सड़क के साथ-साथ बहता लिद्दर नदी (पानी हरे रंग का है) |
शुक्रवार, 1 जनवरी 2016
चन्द माहिया :क़िस्त २६
नए वर्ष की प्रथम प्रस्तुति.....
चन्द माहिया : क़िस्त 26
:1:
बस इतना तो कर माहिया
आ के चुपके से
कर दिल में घर माहिया
:2:
साँसो का बन्धन है
टूटेगा कैसे ?
रिश्ता जो पावन है
:3:
दिल और धड़कने दो
रुख पे है पर्दा
कुछ और सरकने दो
:4:
कुछ अपनी आदत है
हुस्न परस्ती में
कुछ रंग-ए-इबादत है
:5:
आती है सदा फिर भी
लाख ख़फ़ा हो तुम
रहती है वफ़ा फिर भी
-आनन्द.पाठक-
09413395592
चन्द माहिया : क़िस्त 26
:1:
बस इतना तो कर माहिया
आ के चुपके से
कर दिल में घर माहिया
:2:
साँसो का बन्धन है
टूटेगा कैसे ?
रिश्ता जो पावन है
:3:
दिल और धड़कने दो
रुख पे है पर्दा
कुछ और सरकने दो
:4:
कुछ अपनी आदत है
हुस्न परस्ती में
कुछ रंग-ए-इबादत है
:5:
आती है सदा फिर भी
लाख ख़फ़ा हो तुम
रहती है वफ़ा फिर भी
-आनन्द.पाठक-
09413395592
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