आओ किस्सा तुम्हे सुनाए
recent सा है यार
साठ साल की उमर में हो गया
ऑनलाइन मुझे प्यार
ऑनलाइन मुझे प्यार
मिले वो टिंडर पे थे यार
प्रोफाइल देखकर रीझ गया दिल
हुआ पहली नज़र में प्यार
पहली नज़र में प्यार
वो थी रूप का भंडार
कमसिन लचीली
नाक नुकीली
अदाएं तेज तलवार
अदाएं तेज तलवार
सुरीली सुंदर सी वो नार
होंठ रसीले नैन नशीले
कि चढ़ गया मुझपे उसका खुमार
जितना देखूं उतना सोचूं
सोचूं मैं बार बार
सोचूं मैं बार बार
रगो में बहने लगी वो यार
धड़कन धक धक ऐसे बोले
ज्यों बजने लगा सितार
मदहोश हुआ मदमस्त हुआ
कि अब जीना है दिन और चार
जीना है दिन और चार
कि प्रेम ही जीवन का है सार
प्रेम चलूं मैं प्रेम पढूं मैं
बहे अब प्रेम सुधा की धार
कॉल करूं उसे रात रात भर
फ़ोटो को रहूं निहार
फोटो को रहूं निहार
बीवी को भनक लगी इतवार
झगड़े हुए फिर बड़े बड़े
और खूब हुई तकरार
लुट गया मेरा था जो
सुखी सा वो संसार
सुखी सा वो संसार
सभी से खूब हुई फिर रार
हम बोले तुम ही बताओ
क्या तुमको है इनकार
बड़ी उमर के अमिताभ ने
किया था जिया खान से प्यार
जिया खान से प्यार
तब्बू को दिल बैठे थे हार
चीनी कम थी चाय में उनकी
और थे दिल से वो लाचार
नीरस से मेरे जीवन में
आई अब है बहार
जब आई ये बहार
घमासान हुआ एक वर्ल्डवार
प्यार की शक्ति से पर हमने
झेल लिए सब वार
ठाना की पहनाएंगे
अब जयमाला का हार
जयमाला का हार
तो ठुकराया सारा संसार
कद काठी से
हम क्या कम थे
भले थे बाल हमारे चार
बाल हमारे चार
उन्हीं बालों को फिर संवार
निकले ढूंढने हम तो अपनी
षोडशी कमसिन सी वो नार
मंदिर में उनको बुलवाया
लिए चले हम संग अपने
जिगरी से कुछ यार
संग थे अपने यार
हुआ फिर प्रियतम का दीदार
ये वो नहीं थी जिसको अपना
हम दिल बैठे थे हार
कोई बासठ की बुढ़िया थी ।
आफत की जैसे पुड़िया थी
थी इसकी नहीं दरकार
खुद को संभाला पर दिल मेरा
रोया जार जार
दिल रोया जार जार
कि थी चेहरे पे झुर्री हजार
झुकी हुई सी कमर थी उसकी
थे दांत सभी बेकार
चार अधेड़ से बच्चे उसके
बच्चों के बच्चे चार
बच्चे जो थे चार
एक लदा कंधे पे बाहें डार
टूटी कमरिया मेरी क्योंकि
उसका तीस किलो था भार
कूद कूद के सब बच्चों ने
बिगाड़ दी नई सी मेरी कार
नई नई वो कार
बैठ हमने पकड़ी रफ्तार
जान बची और लाखों पाए
घर के बुद्धू घर को आए
अपना सब कुछ हार
अपना सब कुछ हार
कोसू किस्मत को हर बार
ऑनलाइन के चक्कर में
न बीवी मिली न प्यार
न बीवी मिली न प्यार
सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंबहुत सुंदर रचना
जवाब देंहटाएंमजेदार
जवाब देंहटाएंसुन्दर रचना
सुंदर
जवाब देंहटाएंआपकी यह कविता पढ़कर मुझे सच में बहुत मज़ा आया। ऑनलाइन प्यार की शुरुआत, फिर घर में झगड़ा, और आखिर में मंदिर वाला मोड़—सब कुछ बहुत दिलचस्प लगा। आपने हल्के-फुल्के हास्य से एक बड़ी सच्चाई भी दिखा दी कि ऑनलाइन दुनिया हमेशा वैसी नहीं होती जैसी दिखती है।
जवाब देंहटाएंمقال رائع ومفيد جدا أحسنت في طرح الموضوع بطريقة سلسة ومنظمة تجذب القارئ وتوفر له معلومات قيمة ومباشرة تابعنا ايضاء وستفيد من اعمالنا :
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