मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

शनिवार, 4 अगस्त 2018

एक ग़ज़ल : ये आँधी,ये तूफ़ाँ--

एक ग़ज़ल : ये आँधी ,ये तूफ़ाँ--

ये आँधी ,ये तूफ़ाँ ,मुख़ालिफ़ हवाएँ
भरोसा रखें, ख़ुद में हिम्मत जगायें

कहाँ तक चलेंगे लकीरों पे कब तक
अलग राह ख़ुद की चलो हम बनाएँ

बहुत दूर तक आ गए साथ चल कर
ये मुमकिन नहीं अब कि हम लौट जाएँ

अँधेरों को हम चीर कर आ रहे हैं
अँधेरों से ,साहब ! न हम को डराएँ

अगर आप को शौक़ है रहबरी का
ज़रा आईना भी कहीं देख आएँ

अभी  कारवाँ मीर ले कर है निकला
अभी से तो उस पर न उँगली उठाएँ

यहाँ आदमी की कमी तो नहीं है
चलो ’आदमीयत’ ज़रा ढूँढ  लाएँ

न मन्दिर, न मस्जिद, कलीसा न ’आनन’
नया पुल मुहब्बत का फिर से बनाएँ

-आनन्द.पाठक-

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल बुधवार (06-08-2018) को "वन्दना स्वीकार कर लो शारदे माता हमारी" (चर्चा अंक-3054) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    राधा तिवारी

    जवाब देंहटाएं