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बुधवार, 14 अक्तूबर 2020

एक ग़ज़ल

 ग़ज़ल  : बात दिल पे लगा के--


बात दिल पे लगा के बैठे हैं ,

हाय ! वो ख़ार खा के बैठे हैं।


ज़ख़्म-ए-दिल हम दिखा रहें हैं इधर

वो उधर मुँह फ़ुला के बैठे है।


ग़ैर को आप का करम हासिल ,

सोज़-ए-दिल हम दबा के बैठे है।


देखते हैं कि क्या असर उन पर ?

हाल-ए-दिल हम सुना के बैठे है।


रुख़ से पर्दा ज़रा हटा उनका,

होश हम तो गँवा के बैठे हैं।


राह-ए-दिल से कभी वो गुज़रेंगे,

हम इधर सर झुका के बैठे हैं।


इश्क़ में होश ही कहाँ ’आनन’,

खुद ही ख़ुद को भुला के बैठे हैं।   


-आनन्द,पाठक---


शब्दार्थ

सोज़-ए-दिल = दिल मे प्रेम की आग

          = प्रेमाग्नि

7 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रस्तुति का लिंक 15.10.2020 को चर्चा मंच पर दिया जाएगा। आपकी उपस्थिति मंच की शोभा बढ़ाएगी|
    धन्यवाद
    दिलबागसिंह विर्क

    जवाब देंहटाएं
  2. आपकी लिखी रचना ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" पर गुरुवार 15 अक्टूबर 2020 को साझा की गयी है.... पाँच लिंकों का आनन्द पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    जवाब देंहटाएं