कौन दरवेश हैं ---440 वीं पोस्ट
रेस है देश है वेश है इंसा वास्तव में कौन दरवेश है
होते
पेश रंगमंच पर भूमिका निभाने की भी रेस है
देश
वेश न भ्रमाना पीछे से शैतानियत का प्रवेश है
धोखा
खा धोखा देते धोखे में जन्मते व खो जाते है
गजब
कयानात गजब बिसात गजब जीवन की रात
गजब
खिलाडी गजब बिगाडी गजब पिछाडी आगाडी
न
देखा खुदा न जानी मंजिल मची फिर भी हलचल
न
याद कल, न जाना कल रोंदते फिर भी ये दलदल
समझो
बूझो जीवन पहेली जियो हंसते जीवन के पल
पथिक
अनजाना
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