चातुर्य हर जगह
नही सदैव तेरा
चातुर्य हर जगह काम आवे
नही
थोडा या अक्षयज्ञान तुझे आ राह बतावे
न
संगत हर मुसीबत में हो साथ हाथ बटावे
न
कोई तो यहाँ सुने न कोई तुझे कुछ बतावे
गर
सुकर्मों के खाते में नही कुछ बचा शेष हैं
न
भाग्य रहनुमां हमसफर न साथ दरवेश हैं
पथिक
अनजाना