हर तमाशा आमीन -----४२४ वीं पोस्ट
मेरी
माशूका ने कहा काव्यक्षेत्र क्यों हुआ महत्वहीन हैं
मैंने
कहा यही वह क्षेत्र हैं जो दुनिया को जीवनदीन हैं
राज
,व धर्म नेतृत्व विधिवेत्ता ग्रहण ग्रस्त
हो गये
पत्रकार,व
सुधारक धन व घुंघरूओं में मस्त हो गये
कविता
रचियता मतवाले जो निर्भिक मस्ती में लीन हैं
धुआं
यहाँ से नही हैं जहाँ से उठ रहा वह महत्वहीन हैं
जनता
का दर्द पहचानो कवि बने क्यों तमाशबीन हैं
दर्द
सह जनता तो भी हर तमाशे को कहती आमीन हैं
पथिक
अनजाना
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