श्याम स्मृति ----आस्था व उसकी अभिव्यक्ति......
पूजा -प्रार्थना -मंदिर ... आस्था का विषय है ....आस्था एक व्यक्तिगत व समाजगत मनोवैज्ञानिक स्थिति है जो मनुष्य के मन में आत्मविश्वास उत्पन्न करती है । स्वयं पर निष्ठा रखना सिखाती है कि... यदि मैंने अपना कार्य पूर्ण निष्ठा व श्रम से किया है तो आगे आप को ( ईश्वर, दैवीय पीठ, देवस्थान आदि श्रृद्धा के स्थान ) समर्पित, अब जो भी हो । तभी तो सामान्यत: अपना कार्य सिद्ध न होने पर भी सामान्यजन की श्रृद्धा कम नहीं होती । वह भगवान को व अन्य को दोष न देकर अपने कर्मों की कमी व भाग्यफल को मानकर पुनः सहज भाव में आगे अपने कार्य में लग जाता है ।'
मन में आस्था रखना भी उचित है ..आवश्यक नहीं कि पूजा-पाठ किया ही जाय | परन्तु आस्था का व्यक्त होना भी आवश्यक व महत्वपूर्ण है, इससे पीछे आने वाले व अन्य लोग प्रभावित, उत्साहित व प्रेरित होते हैं ।
मन में आस्था रखना भी उचित है ..आवश्यक नहीं कि पूजा-पाठ किया ही जाय | परन्तु आस्था का व्यक्त होना भी आवश्यक व महत्वपूर्ण है, इससे पीछे आने वाले व अन्य लोग प्रभावित, उत्साहित व प्रेरित होते हैं ।