सकल सृष्टि का सर्वश्रेष्ठ प्राणी होता है |
बीज नित्य नव आशाओं के मानव बोता है |
जाने कितनी नयी नयी सुख -सुविधा भोगीं ,
कष्ट पड़े फिर भला आज तू क्यों रोता है |
सुख साधन के हेतु उचित-अनुचित सब भूला,
जो भी जग को दिया वही तो अब ढोता है |
उचित व अनुचित मानव तभी समझ पाता है,
जब उसको अनुभव कष्टों का भी होता है |
ईश्वर की है देन, कष्ट से क्या घबराना,
खरा वही है जो न कष्ट में, धीरज खोता है |
ईश्वर का कर धन्यवाद, दुखों के कारण,
इस असार जग का सत-ज्ञान तुझे होता है |
कष्ट पड़ें, चिंता क्या, आने-जाने हैं,
कष्टों से प्रभु पापकर्म तेरे धोता है |
सब कुछ ईश्वर के ही ऊपर छोड़ श्याम तू,
मिलता तुझको वही सदा जो तू बोता है ||
बीज नित्य नव आशाओं के मानव बोता है |
जाने कितनी नयी नयी सुख -सुविधा भोगीं ,
कष्ट पड़े फिर भला आज तू क्यों रोता है |
सुख साधन के हेतु उचित-अनुचित सब भूला,
जो भी जग को दिया वही तो अब ढोता है |
उचित व अनुचित मानव तभी समझ पाता है,
जब उसको अनुभव कष्टों का भी होता है |
ईश्वर की है देन, कष्ट से क्या घबराना,
खरा वही है जो न कष्ट में, धीरज खोता है |
ईश्वर का कर धन्यवाद, दुखों के कारण,
इस असार जग का सत-ज्ञान तुझे होता है |
कष्ट पड़ें, चिंता क्या, आने-जाने हैं,
कष्टों से प्रभु पापकर्म तेरे धोता है |
सब कुछ ईश्वर के ही ऊपर छोड़ श्याम तू,
मिलता तुझको वही सदा जो तू बोता है ||