मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


फ़ॉलोअर

खुद दीवालों पर टंगे होवोगे===पथिकअनजाना==482 वीं पोस्ट लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
खुद दीवालों पर टंगे होवोगे===पथिकअनजाना==482 वीं पोस्ट लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

मंगलवार, 11 फ़रवरी 2014

खुद दीवालों पर टंगे होवोगे===पथिकअनजाना==482 वीं पोस्ट



कहते क्यों हो कि इस जग में तुम बहुत गरीब हो
राह तकता  कल्पित खुदा,,अकल्पित बडे काम में
नही देखता कितने गरीब हो वो मदद को तैयार हैं
शर्तिया काम कराने वाले खुदा को अमीरों से मिलाते
विवश करते पर वो निश्छलियों में समाना चाहता हैं
विवश खुदा, तुम क्यों अमीरों में मशहूर होना चाहते
देखो खो न जावे कही प्रकृति की लुभावनी आड में
नही दुनियायी हलचलों में ,खेलता तुम्हारी रगों में
आत्मा की खिडकी से निश्छल हो देखो पास पावोगे 
मगर रहे ध्यान यह राह किसी को न तुम बताना
पाया कोहनूर खोवोगे खुद दीवालों पर टंगे होवोगे
पथिक अनजाना