आदि अभाव अकाम अज,
अगुन अगोचर आप,
अमित अखंड अनाम
भजि,श्याम मिटें त्रय-ताप | १
त्रिभुवन गुरु औ जगत
गुरु, जो प्रत्यक्ष सुनाम,
जन्म मरण से मुक्ति
दे, ईश्वर करूं प्रणाम | २
हे माँ! ज्ञान
प्रदायिनी,ते छवि निज उर धार,
सुमिरन कर दोहे रचूं,
महिमा अपरम्पार | ३
श्याम सदा मन में
बसें, राधाश्री घनश्याम,
राधे राधे नित जपें, ऐसे श्रीघनश्याम | ४
अंतर ज्योति जलै
प्रखर, होय ज्ञान आभास,
गुरु जब अंतर बसि
करें,गोविंद नाम प्रकाश | ५
शत शत वर्षों में
नहीं, संभव निष्कृति मान,
करते जो संतान हित,
मातु-पिता वलिदान |६