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मंगलवार, 30 जुलाई 2013

"माँ शारदा वंदन" (श्यामा अरोरा)


अम्ब शारदे वंदन तेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 

दर पर आये है हम भिखारी 
पूरी कर दो आशा हमारी 
सुन लो करुण यह क्रंदन मेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 
अम्ब शारदे वंदन तेरा

माँ मुझको वीणा का स्वर दो 
मेरा राग अमर माँ कर दो 
मस्तक कर दो चन्दन मेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 
अम्ब शारदे वंदन तेरा


गीत तुम्हारे लिखती जाऊ 
मईया तुमसे यह वर पाऊ 
खिला  रहे मन नंदन मेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 
अम्ब शारदे वंदन तेरा

उर में मेरे भाव समा दो 
श्वास श्वास में सुर बिखरा दो 
कहे ह्रदय स्पंदन मेरा 
हम करते अभिनन्दन तेरा 
अम्ब शारदे वंदन तेरा

रविवार, 28 जुलाई 2013

“सरस्वती वन्दना” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

सरस्वती वन्दना

इस वन्दना को मधुर स्वर में गाया है
अर्चना चावजी ने

मेरी गंगा भी तुम, और यमुना भी तुम,
तुम ही मेरे सकल काव्य की धार हो।
जिन्दगी भी हो तुम, बन्दगी भी हो तुम,
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।

मुझको जब से मिला आपका साथ है,
शह मिली हैं बहुत, बच गईं मात है,
तुम ही मझधार हो, तुम ही पतवार हो।
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

बिन तुम्हारे था जीवन बड़ा अटपटा,
पेड़ आँगन का जैसे कोई हो कटा,
तुम हो अमृत घटा तुम ही बौछार हो।
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।


तुम महकता हुआ शान्ति का कुंज हो,
जड़-जगत के लिए ज्ञान का पुंज हो, 
मेरे जीवन का सुन्दर सा संसार हो। 
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

तुम ही हो वन्दना, तुम ही आराधना,
दीन साधक की तुम ही तो हो साधना,
तुम निराकार हो, तुम ही साकार हो।
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।

आस में हो रची साँस में हो बसी,
गात में हो रची, साथ में हो बसी,
विश्व में ज्ञान का तुम ही भण्डार हो।
गीत-गजलों का तुम ही तो आधार हो।।