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गुरुवार, 29 मार्च 2018

Laxmirangam: वर्तमान शिक्षा प्रणालीभाषा देखें : घ...

Laxmirangam: सरकारों को चाहिए कि BE, MBBS, CA, ICWA, Ph.D  व भाषा विशारद जैसे क्षेत्रों में छात्रों को भेड़ बकरियों सा आभास मत दीजिए, उनमें गुणवत्ता लाइए. कम से कम शिक्षण के क्षेत्र में भ्रष्टाचार पूरी तरह से बंद करवाइए. जितनी नौकरियाँ उपलब्ध करा पाते हैं, उसी अनुपात में शिक्षा को भी नियंत्रित कीजिए. बेरोजगार पैदा मत करते जाईए.


अच्छी गुणवत्ता के साथ हमारे विज्ञों को बाहर परदेश जाने दीजिए .. मत रोकिए, ब्रेन ड्रेन के नाम पर. मत पीटिए सर कि आई आई टी से पढ़कर बच्चे देश की सेवा करने की बजाए अमेरिका जैसे देशों में सेवा देते हैं. क्या करेंगे बच्चे, यदि देश में उचित नौकरी उपलब्ध न हो तो ?

अधिकारियों को चाहिए कि वे इन समस्याओँ पर ध्यान दे. शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए कुछ करें. परीक्षा बिना लिए लिए बच्चे को पाँचवीं तक निरक्षर बनाकर रखना किसी मुर्खता पूर्ण निर्णय से कम नहीं है. शिक्षको को अपनी नौकरी के लिए इतनी सुविधाएं दें कि वे इसे नौकरी नहीं समाज सेवा समझ सकें. वरना यह बेमतलब की शिक्षा व प्रणाली देश को डुबाने में पूरा सहयोग करेगी.

Laxmirangam: वर्तमान शिक्षा प्रणालीभाषा देखें : घ...

बुधवार, 14 मार्च 2018

चिड़िया: बाँसुरी

चिड़िया: बाँसुरी: बाँसुरी - 1- बाँस का इक नन्हा सा टुकड़ा, पोर - पोर में थीं गाँठें ! जीवित था पर प्राण कहाँ थे ? चलती थीं केवल साँसें !!! मन का मौजी,...

रविवार, 4 मार्च 2018

एक ग़ज़ल : ये कैसी रस्म-ए-उलफ़त है----

एक ग़ज़ल : ये कैसी रस्म-ए-उलफ़त है----

ये कैसी रस्म-ए-उलफ़त है ,न आँखें नम ,न रुसवाई
ज़माने को खटकता क्यों  है दो दिल की  पज़ीराई

तुम्हारे हाथ में पत्थर ,  जुनून-ए-दिल इधर भी है
न तुम जीते ,न दिल न हारा,नही उलफ़त ही रुक पाई

न भूला है ,न भूलेगा कभी यह आस्तान-ए-यार 
मेरी शिद्दत ,मेरे सजदों की अन्दाज़-ए-जबींसाई

तुम्हारे सितम की मुझ पर अभी तो इन्तिहा बाक़ी
कभी देखा नहीं होगा , मेरी जैसी शिकेबाई

तुम्हारी तरबियत में ही कमी कुछ रह गई होगी
वगरना कौन करता है मुहब्ब्त की यूँ  रुसवाई

कभी जब ’मैं’ नहीं रहता ,तो बातें करती रहती हैं
उधर से कुछ तेरी यादें ,इधर से मेरी तनहाई

हमारी जाँ ब-लब है ,तुम अगर आ जाते इस जानिब
यक़ीनन देखते हम भी कि क्या होती मसीहाई

मैं मह्व-ए-यार में डूबा रहा ख़ुद से जुदा ’आनन’
मुझे होती ख़बर क्या कब ख़िज़ाँ आई ,बहार आई 

-आनन्द.पाठक-

शब्दार्थ 
पजीराई =चाहत ,स्वीकृति ,मक़्बूलियत
आस्तान-ए-यार = प्रेमिका के देहरी का चौखट/पत्थर
अन्दाज़-ए-जबींसाई = माथा रगड़ने का अन्दाज़./तरीक़ा
शिकेबाई      =धैर्य/धीरज/सहिष्णुता
तरबियत =पालन पोषण 
जाँ-ब-लब =मरणासन्न स्थिति
मह्व-ए-यार = यार के ध्यान में मग्न /मुब्तिला

गुरुवार, 1 मार्च 2018

होली पर एक भोजपुरी गीत---

होली पर एक ठे भोजपुरी गीत रऊआ लोग के समने--अशीरवाद चाही ]
होली पर सब मनई लोगन के हमार बधाई बा
--------होली पर एक भोजपुरी गीत-----------

कईसे मनाईब होली ? हो राजा !
कईसे मनाईब होली ........
आवे केS कह गईला अजहूँ नS अईला
न ’एसमसवे" भेजला नS पइसे पठऊला
पूछा नS कईसे चलाईला खरचा-
तोहरा का मालूम? परदेसे रम गईला
कईसे सजाईं रंगोली , हो राजा !
कईसे सजाईं रंगोली......
मईया के कम से कम लुग्गा तS चाही
’नन्हका’ छरिआईल बा जूता तS चाही
मँहगाई मरले बा कि आँटा बा गीला-
’मुनिया’ कs कईसे अब लहँगा सियाई ?
कईसे सियाईं हम चोली ? हो राजा !
कईसे सियाईं चोली....
’रमनथवा’ मारे ला रह रह के बोली
’कलुआ’ मुँहझँऊसा करेला ठिठोली
पूछेलीं गुईयां सब सखियाँ सहेली
अईहैं नS ’जीजा’ का अबकीओ होली?
खा लेबों जहरे कS गोली, हो राजा !
खा लेबों जहरे कS गोली........
अरे! कईसे मनाईब होली हो राजा..कैसे मनाईब होली
-आनन्द.पाठक
एसमसवे = S M S ही