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सोमवार, 13 जुलाई 2020
सोमवार, 22 जून 2015
आलेख "मैं और मेरी लाईब्रेरी" (अमन 'चाँदपुरी')
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अमन 'चाँदपुरी',
आलेख,
मैं और मेरी लाईब्रेरी
कवि, लेखक, सम्पादक और फ़ोटोग्राफर। 'दोहा सम्राट' एवं 'कुंडलियां शिरोमणि' की मानद उपाधियों सहित दर्जनों पुरस्कार एवं सम्मान से अलंकृत। 'दोहा दर्पण' पुस्तक का सम्पादन।
बुधवार, 30 अप्रैल 2014
बहुत कठिन है डगर सरकार के लिए
आने वाली सरकार से लोगो क्या अपेक्षाएं है -
मैंने कई गण मान्य लोगो से इस विषय पर बात की । उन सबके विचार इस प्रकार रहे--
1) प्राइवेट स्कूलों , कलेजो,की फीस बहुत ज्यादा है अंधाधुंध पैसा बहाओ तब कहीं जाकर अपने बच्चों की अच्छी शिक्षा दिला सको । स्कूल हो या कालेज सभी जगह यही हाल है । कालेजों मे अच्छी शिक्षा हेतु बच्चों के माता पिता पानी की तरह पैसा बहाते है ट्यूशन फीस तो अलग हास्टल फीस इतनी ज्यादा है और बच्चो को खाने पीने की कोई खास व्यवस्था नहीं होती । करीब करीब हर माता जिनके बच्चे बाहर पढ़ रहे है सभी को यह शिकायत है । सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं ।
2) आरक्षण के कारण गुणवत्ता समाप्त हो चुकी है । जो वाकई काबिल है वो दर दर भटक रहा है । गुण वत्ता को प्रमुखता दी जाए ।
3) महिलाओं को सुरक्षा मिले , वे आजादी से कहीं भी आ जा सके । अभी हर माँ डरती है बेटी को बाहर अकेले भेजने मे , कहीं कोई दुर्घटना न हो जाए ।
4) बिजली की समस्या सबसे ज्वलंत है इसके लिए कुछ ठोस उपाय किए जाएँ ।
5) शराब , सिगरेट तंबाकू जैसी चीजों पर बैन लगाया जाए , जिससे नस्ल खराब हो रही है । युवा इन सबके फेर मे अपना जीवन बर्बाद कर रहा है , घरों की शांति शराब की वजह से समाप्त हो रही है ।
6) यातायात के नियमों को कड़ाई से लागू किया जाए । ताकि आए दिन जाम लगने की समस्या से निजात मिल सके ।
7) महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिले खास कर उन महिलाओं को कोई रोजगार नहीं करती है या गृहणी है । इसके लिए केयर इकोनोमी फार्मूला भी उचित होगा ।
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