जब मध्य में रहते हो—पथिक अनजाना---574 वीं पोस्ट
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अजीब महसूस न होगा तुम्हें गर तत्पर
तुम सबसे नीचे व ऊचे स्तर के लिये रहो
वर्ना जिन्दगी में लोग धक्का तभी देते हैं
जब मध्य में रहते हो तुम सदा के लिये
जो जीवित हैं वह
नीचे रह नही सकता
जो मध्य में वह
कुछ कह नही सकता
जो ऊपर वह कुछ भी
सुन नही सकता
अजब हालात प्रकृति
के होते मेरे यारों
अनूठे इस
सिद्धान्त से इंसान हैं परेशान
चाहत पर कहाँ रखे
अपनी वह पहचान
मिले ,मुझे बता
देना आसां होगा सफर
पथिक अनजाना