मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


फ़ॉलोअर

जब मध्य में रहते हो—पथिक अनजाना---574 वीं पोस्ट लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जब मध्य में रहते हो—पथिक अनजाना---574 वीं पोस्ट लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 6 अप्रैल 2014

जब मध्य में रहते हो—पथिक अनजाना---574 वीं पोस्ट



जब मध्य में रहते हो—पथिक अनजाना---574 वीं पोस्ट
http://pathic64.blogspot.com
अजीब महसूस न होगा तुम्हें गर तत्पर
तुम सबसे नीचे व ऊचे स्तर के लिये रहो
वर्ना जिन्दगी में लोग धक्का तभी देते हैं
जब मध्य में रहते हो तुम सदा के लिये
जो जीवित हैं वह नीचे रह नही सकता
जो मध्य में वह कुछ कह नही सकता
जो ऊपर वह कुछ भी सुन नही सकता
अजब हालात प्रकृति के होते मेरे यारों
अनूठे इस सिद्धान्त से इंसान हैं परेशान
चाहत पर कहाँ रखे अपनी वह पहचान
मिले ,मुझे बता देना आसां होगा सफर

पथिक अनजाना