अपनी ही
पूँछ को
मुँह में
भर लेने की
पवित्र
इच्छा लिए
पागल
कुत्ते की भांति
दौड़ता
रहता है
आज का आदमी
घूमता
रहता है गोल-गोल
जैसे
दौड़ती रहती है
सेकण्ड की
सुईं
घड़ी के
वक्ष पर
रात-दिन.
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