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शनिवार, 3 अगस्त 2013

आज का आदमी




अपनी ही पूँछ को
मुँह में भर लेने की
पवित्र इच्छा लिए
पागल कुत्ते की भांति
दौड़ता रहता है 
आज का आदमी
घूमता रहता है गोल-गोल
जैसे दौड़ती रहती है
सेकण्ड की सुईं
घड़ी के वक्ष पर
                        रात-दिन.

4 टिप्‍पणियां:

  1. आज का आदमी
    घूमता रहता है गोल-गोल
    जैसे दौड़ती रहती है
    सेकण्ड की सुईं
    घड़ी के वक्ष पर
    रात-दिन.

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  2. बहुत खूब बहुत खूब बहुत खूब -नेताओं की तरह कुत्ताया हुआ है आदमी।आदमी को दुलत्ती मारता है आदमी।ॐ शान्ति। बढ़िया सशक्त रचना।

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  3. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि की चर्चा आज रविवार (04-08-2013) के दादू सब ही गुरु किए, पसु पंखी बनराइ : चर्चा मंच 1327
    में मयंक का कोना
    पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  4. वाह बहुत खूब कहा .....आज का आदमी
    घूमता रहता है गोल-गोल
    जैसे दौड़ती रहती है
    सेकण्ड की सुईं
    घड़ी के वक्ष पर
    रात-दिन.|

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