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मंगलवार, 13 अगस्त 2013

एक और महाभारत


एक महाभारत तुमको फिर करना होगा |
उठो पांड्वो उठो तुम्हे अब लड़ना होगा |

शकुनी चौसर की बाजी बिछाए बैठा हुआ है | 
जीत अनीति से दुर्योधन फिर ऐंठा हुआ है |
आज पराजित फिर से उसको करना होगा |
उठो पांड्वो उठो तुम्हे अब लड़ना होगा |

आज हो रही वही त्रासदी फिर देखो |
आर्तनाद कर रही द्रौपदी फिर देखो |
एक-एक आंसू का कर्ज तुम्ही को भरना होगा |
उठो पांड्वो उठो तुम्हे अब लड़ना होगा |

चुप रह रह कर अपना सब कुछ खो बैठे है  |
हम अपने घर से ही बेघर हो बैठे है |
उन्हें हमारा हक़ तो वापस करना होगा |
उठो पांड्वो उठो तुम्हे अब लड़ना होगा |

डर कर छुप कर चुप बैठना अपनी रीत नहीं है |
तुम कायर हो या तुम्हे देश संग प्रीत नहीं है |
देश के लिए प्राण न्योछावर करना होगा |
उठो पांड्वो उठो तुम्हे अब लड़ना होगा |

आओ मिल कर एक सेना हम तैयार करें |
और जाकर उस शत्रु के सर पर वार करे |
एक-एक को सवा लाख से लड़ना होगा |
उठो पांड्वो उठो तुम्हे अब लड़ना होगा |

बहुत सह चुके और सितम अब न सहना |
तुम्हे कसम है और नहीं अब चुप रहना |
अन्याय का तख्ता आज पलटना होगा   
उठो पांड्वो उठो तुम्हे अब लड़ना होगा |

अर्जुन का गांडीव भीम की गदा उठाओ |
सत्य युधिष्ठिर का अपना कर बढते जाओ |
अब तो रण भूमि में तुम्हे उतरना होगा |
उठो पांड्वो उठो तुम्हे अब लड़ना होगा | 
...............................श्यामा अरोरा 

4 टिप्‍पणियां:

  1. उद्बोधक कविता....

    --उठो पांड्वो = उठो भारतीयो ..कहा जाय तो अधिक समीचीन होगा...

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  2. गहरा बोध लिए ... आह्वान करते हुए ... सुन्दर रचना ...

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  3. वाह कुछ ऐसे ही विचार मेरी रचना में भी हैं ।
    सख्त जरूरत है दुष्मन को जवाब देने की ।

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