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रविवार, 19 फ़रवरी 2017

दोहामुक्तक "प्यार" (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक')


जीवन में सबको नहीं, मिल पाता है प्यार
बिन माँगे मिल जाय जो, वो होता उपहार
करना दग़ा-फरेब मत, कभी किसी के साथ
सम्बन्धों पर है खड़ी, दुनिया की दीवार


गुरुवार, 6 अगस्त 2015

अगर


अगर तुमने मेरा प्यार सजाया होता 
अगर तुमने मुझे दिल से लगाया होता 
नूर बनके चमकता तेरी जिंदगी में 
तुम्हे काली रातों ने न सताया होता

गर तुम्हे मेरी शाम से उल्फत होती 
या की मेरे नाम से मुहब्बत होती 
गीली रेत पर लिख कर के मेरा नाम 
कुछ सोच कर  के न मिटाया होता 

काश ऐसा होता तो अच्छा होता 
के तेरा इश्क़ का दावा सच्चा होता 
मेरा भी दावा है की हर एक वादा
मैंने तहे दिल से निभाया होता

www.shivrajwritings.blogspot.in
------शिवराज---