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गुरुवार, 1 अगस्त 2013

किन्नर सरकार



किन्नर सरकार

संसद में चुन किन्नर आए, 
पीएम शब्बो को चुना गया |
चन्दा को गृह,रजनी विदेश,
कजरी को रक्षा दिया गया |

बाकी विभाग भी जल्दी  ही,
किन्नरगण में बंट जाने दो|
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार बनाने  दो |

अगले दिन हुक्म हुआ जारी,
सब  ड्रेस-कोड में  आएंगे |
काला  ब्लाउज, नीली  साड़ी,
सब  अपने  लिए  बनाएंगे |

मंत्री - संत्री  अनुपालन कर,
साड़ी - ब्लाउज में आने दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार चलाने  दो |

खुल गया नया चैनल आला,
संसद के दृश्य दिखाता  था |
लाली   जो रेल मिनिस्टर था,
वह रेल-बजट बतलाता  था |

प्रतिवाक्य बजा कर दो ताली,
इन्कम - सुविधा, बतलाने दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार चलाने  दो |

ठुमका दे ताली, कुछ सांसद,
कहते-कहते उठ  खड़े  हुए |
यह बजट सिर्फ नर-नारी का,
ना किन्नर के कुछ भले हुए |

कुछ हाय-हाय,   और् दे ताली,
उनको वाकआउट करजाने दो |
चलचुका  बहुत शासन सबका,
किन्नर - सरकार चलाने  दो |

आया  अर्जेण्ट  काम   ऐसा,
डीएम आफिस में जा पंहुचा |
ठोकी   ताली   चपरासी  ने,
फिर  आने  का कारण पूछा |

फिर भेंट पकड़  अन्दर जाकर,
आना   मेरा   बतलाने  दो |
चल  चुका बहुत शासन सबका,
किन्नर - सरकार  चलाने  दो |

फिर ठोक-ठोक अपनी ताली,
उसके    साहब  बाहर  आए |
हे 'राज'   तुरत अन्दर आओ,
यह   कह  ठुमके,  नाचे,गाए |

अन्दर कमरे में,  क्या देखा,
वह हाल मुझे समझाने दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार चलाने  दो |

अन्दर कमरे मे एक तरफ,
ढोलक पर थापें  पड़ती थीं |
बाजे पर बैठीं,   बड़ी  बुआ,
सैटिंग सरगम की करती थीं |

मैंने पूछा यह सब क्या है?,
बोले चुप? कोर्ट  लगाने दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार चलाने  दो |

स्कूलों  में  जब गए  प्रिय,
था अजब हाल विद्यालय का |
ताली - ठुमके  के साथ प्रेयर,
रेसिस में,  डांस हुआ सबका |

लय - सुर में बच्चे बात करें,
ताली-ठुमका, सिखलाने दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार चलाने  दो |

प्रातः देखा आया  स्वच्छक,
गा-गाकर, गंद   उठाता था |
झाड़ू से ज्यादा खुद हिलता,
सुर-बेसुर में कुछ गाता था |

मैंने पूछा,  बोला   चुप  जा?,
सत्ता का  हुकम बजाने  दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार  चलाने  दो |

क्लीनिक में ताली दे मरीज,
डाक्टर को  हाल बताता था |
फिर दे ताली, डाक्टर साहब,
लिखलिखकर दवा बताता था |

आया-नर्सों को ठुमक ठुमक,
गोली  खाना बतलाने  दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार चलाने  दो |

बैंकों   में अफसर खड़ा-खड़ा,
ठुमके दस बार लगाता था |
कागज पर दस्खत से पहले,
ताली नौ बार बजाता  था |

पूछा,  बोला चुप रह,  भय्या?,
बस बिजनेस हमें बढाने दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार चलाने  दो |

जब प्रमुखसचिव मंत्री जी के,
दस्खत कर - वाने आता था |
वह ठुमक-ठुमक, ताली देकर,
फाइल  का सार बताता था |

मंत्रीजी को फिर ठुमक-ठुमक,
फाइल पर 'थम्ब' लगाने दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार  चलाने  दो |

अफसर    को गार्ड सलामी का,
होगया पास एक नियम नया |
एक हाथ कमर पर रक्खा हो,
एक हाथ शीश पर धरा गया |

'अय हय ले मुए सलामी ले',
कह कर सैल्यूट लगाने  दो |
चलचुका बहुत शासन सबका,
किन्नर-सरकार  चलाने  दो |

जब खुली आंख   देखा पत्नी,
अचरज से भरी  नजर आई |
एक हाथ कमर पर था अपना,
और  एक भुजा सर पर पाई |

अपनी   हालत पर हंस-हंसकर,
आंसू   अविराम   बहाने दो |
ये उल्टा - पल्टा  क्या देखा है,
सपनों का  गणित लगाने दो |
चल चुका बहुत शासन सबका,
किन्नर - शासन को जाने  दो |
***

1 टिप्पणी:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि का लिंक आज बृहस्पतिवार (01-08-2013) को २९ वां राज्य ( चर्चा -1324 ) में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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