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गुरुवार, 8 अगस्त 2013

कवि से आवाहन

हे कवि अपनी कलम के आज फिर जौहर  दिखा दो । 
रचो कवितायें नयी एक क्रांति तुम फिर से जगा दो ।\

कुछ रचो ऐसा की भारत की जवानी फिर जगे । 
कुछ लिखो ऐसा की टूटे नींद तम तम में भगे ।  
लेखनी की नोंक से तुम व्यग्रता उर की बढ़ा  दो  
रचो कवितायें नयी एक क्रांति तुम फिर से जगा दो । 

क्या हुआ भारत को देखो सो रहा है वो । 
आलस्यता में राष्ट्र गरिमा खो रहा है वो । 
चेतना के बेगुल से तुम सुप्त भारत को जगा दो । 
रचो कवितायें नयी एक क्रांति तुम फिर से जगा दो ।

भारती की वाणी हो माँ  भारती के लाल । 
भारती की चेतना माँ  भारती के भाल । 
वाणी की टंकार से भारत मही  को तुम गूंजा दो । 
रचो कवितायें नयी एक क्रांति तुम फिर से जगा दो ।
………………………. श्यामा अरोरा 





8 टिप्‍पणियां:

  1. क्या बात है ...सुन्दर अति सुन्दर ...ओजपूर्ण ..

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  2. आपने लिखा....हमने पढ़ा....
    और लोग भी पढ़ें; ...इसलिए शनिवार 10/08/2013 को
    http://nayi-purani-halchal.blogspot.in
    पर लिंक की जाएगी.... आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है ..........धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. वीर रस के कवियों को अब अपना दायित्व निभाना होगा और जनता के सोये हुए जोश को जगाना होगा !!
    ओजपूर्ण सुन्दर रचना !!

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  4. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टि का लिंक आज शुक्रवार (09-08-2013) को मेरे लिए ईद का मतलब ग़ालिब का यह शेर होता है :चर्चा मंच 1332 ....में "मयंक का कोना" पर भी है!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. “भारत की जवानी फिर जगे”
    “भारत को देखो सो रहा है”
    “राष्ट्र गरिमा खो रहा है”

    बहुत निराशाजन स्थिति बयान कर दी आपने।
    क्या वाकई युद्ध की नौबत आ गयी है?
    बहरहाल आपकी कविता भा गयी है...!!

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    उत्तर
    1. निराशा में आशा की किरण जगाने का प्रयास है |
      और आज स्थिति है क्या सभी को आभास है |

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