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सोमवार, 11 मार्च 2024

 

चाँदनी महल

का

रहस्य

पोस्ट-कार्ड

रजत आठवीं कक्षा का छात्र था.

एक दिन वह स्कूल से घर लौट रहा था. स्कूल घर से अधिक दूर था इसलिए वह पैदल ही स्कूल आया-जाया करता था. रास्ते में उसने एक जगह एक पोस्ट-कार्ड पड़ा देखा. कुछ सोचे बिना ही उसने वह पोस्ट-कार्ड उठा लिया. पोस्ट-कार्ड किसी दुर्गा सिंह के नाम भेजा गया था.

एक पल के लिए रजत को लगा कि उसे किसी और का पोस्ट-कार्ड उठाना नहीं चाहिए था. उसने पोस्ट-कार्ड को उसी जगह रख देने की बात सोची. पर फिर जाने क्यों उसका मन हुआ कि पत्र पढ़ कर देखे कि उसमें लिखा क्या था. वह पत्र पढ़ने लगा, पत्र में लिखा था:

तुम्हें तो पता ही है कि मेरे पास माँ का कोई भी चित्र नहीं है. यह बात मुझे बहुत खलती है. माँ का एक चित्र शायद पिताजी ने कभी बनवाया था और उन्होंने उस चित्र को अच्छे से फ्रेम भी करवाया था. क्या तुम्हें उस तस्वीर के बारे में कोई जानकारी है? और अगर वह घर में कहीं है तो उसे ले अपने साथ आओ. विश्वास करो हमारे लिए वह तस्वीर बहुमूल्य है.’

रोचक पत्र है. लेकिन पत्र लिखने वाले ने अपना नाम नहीं लिखा है, ऐसा क्यों? शायद भूल गया होगा. या कुछ और बात है?उसने मन ही मन कहा.

उसके मन में आया कि डाकिये ने यह पत्र गलती से रास्ते में गिरा दिया होगा.

क्यों मैं ही जाकर यह पत्र दुर्गा सिंह को दे आऊँ?’ उसने सोचा.

उसने पता देखा, पता था: चाँदनी महल, चौड़ी सड़क, राज नगर. यह जगह उसके घर से ज़्यादा दूर थी. उसने तय किया कि दुपहर बाद माँ को बता कर वह पत्र चाँदनी महल में दे आयेगा.

शाम होने से पहले माँ को बता कर वह पत्र देने चल दिया. राज नगर पहुँच कर वह चौड़ी सड़क गया. उसने कई घरों के बाहर लगी नाम पट्टियाँ देखी. पर किसी पट्टी पर चाँदनी महल लिखा था. एक जगह उसने एक पान वाले की छोटी सी दुकान देखी, वह उस पान वाले के पास आया और बोला, क्या आपको पता है कि चाँदनी महल कहाँ है?

पान वाले ने उसे घूर कर देखा. फिर उसने कहा, क्यों? तुम्हें क्या काम हैं वहाँ?

रजत पान वाले को पोस्ट-कार्ड के बारे में बताने ही वाला था कि उसके मन में आया, ‘मैं इसे क्यों कुछ बताऊँ? इसने प्रश्न किस ढंग से किया था? और किस तरह मुझे घूर कर देख रहा है. नहीं, इसे कुछ बताने की आवश्यकता नहीं है.

उसने कहा, मैं वह महल देखना चाहता हूँ. मेरा एक मित्र इधर रहता है. उसने कहा था कि यहाँ एक पुराना महल है, किसी राजा का. शायद चाँदनी महल ही वह महल है.

मज़ाक कर रहा होगा वह, पान वाले कहा और फिर हाथ से एक घर की ओर संकेत किया. चाँदनी महल सड़क के दूसरी ओर दुकान से थोड़ी दूरी पर ही था.

चाँदनी महल नाम की ही महल था. वह एक साधारण सा मकान था, एक पुरानी-सी दो मंज़िला हवेली थी. हवेली के चारों ओर चार-पाँच फुट ऊंची दीवार थी. सामने लोहे का गेट था जिस पर शायद वर्षों से पेंट नहीं हुआ था. चारदीवारी के भीतर हर तरफ घास और झाड़ियाँ दिखाई दे रही थीं. हवेली  के पीछे एक विशाल पेड़ भी था.   

चाँदनी महल पूरी तरह सुनसान लग रहा था. ऐसा लगता था जैसे महीनों से उसका गेट भी खोला गया हो. रजत को यह सब विचित्र लगा. उसने आसपास देखा. वहाँ कोई भी था सिवाय एक भिखारी के जो चाँदनी महल के सामने बैठा भीख मांग रहा था.

अगर यहाँ कोई रहता नहीं है तो यह पत्र इस पते पर क्यों भेजा गया? रजत ने सोचा.

उत्सुकतावश रजत ने लोहे का गेट थोड़ा-सा खोला और चाँदनी महल की चारदीवारी के अंदर गया.

©आइ बी अरोड़ा

कहानी का दूसरा भाग अगले अंक में प्रकाशित किया जायेगा

शंखनाद संगठन साहित्य, संगीत,लेखन, रंगमंच और पत्रकारिता के लिए 14 विभूतियों को सिरमौर गौरव-2024

 

नाहन ,साहित्य ,संगीत ,कला ,मीडिया ,रंगमंच और समाजसेवा के क्षेत्र में प्रदेशभर में पिछले कई वर्षों से राज्यस्तरीय आयोजन करने वाली संस्था "शंखनाद संगठन" ने  नाहन में कला भाषा एवं संस्कृति अकादमी शिमला के सहयोग से एक राज्यस्तरीय भव्य आयोजन किया ज़िसमें प्रदेशभर में साहित्य ,संगीत ,कला ,रंगमंच ,मीडिया और लेखन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाली 14 विभूतियों को शंखनाद विशिष्ट सम्मान " सिरमौर गौरव -2024 " से विभूषित किया गया  .शंखनाद संगठन के प्रदेश अध्यक्ष श्री ललित शर्मा और निदेशक डॉ.श्रीकांत अकेला के अनुसार इस भव्य अलंकरण समारोह में सेवानिवृत आई ए एस अधिकारी श्री कश्मीर चन्द मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए  जबकि प्रसिद्ध लेखक भाषा संस्कृति विभाग के पूर्व सहायक निदेशक ,पूर्व सहायक निदेशक भाषाविद श्री गोपाल दिलैक ने समारोह की अध्यक्षता  की ,इस विशिष्ट सम्मान समारोह में पूर्व अतिरिक्त सचिव विधि विभाग ,प्रसिद्ध चिंतक राजेन्द्र भट्ट ,प्रसिद्ध समाजसेवी विनोज शर्मा और भारत विकास परिषद नाहन के अध्यक्ष और समाजसेवी एल. आर. भारद्वाज समारोह के विशिष्ट अतिथि थे  ,संस्था के पदाधिकारियों के अनुसार इस समारोह में प्रथम सत्र में गीत संगीत और सम्मान समारोह हुआ  और दूसरे सत्र में साहित्यिक गोष्ठी आयोज़ित की गई  ,  जिसकी अध्यक्षता प्रदेश की वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती शबनम शर्मा ने की , कार्यक्रम  में प्रसिद्ध कवि भुवन जोशी और अनिल शर्मा ने बेहतर मंच संचालन किया,इस  समारोह में साहित्य लेखन के क्षेत्र में सोलन के डॉ.प्रेमलाल गौतम,साहित्य लेखन के क्षेत्र में मंडी की प्रसिद्ध लेखिका डॉ.रेखा वशिष्ठ ,लेखन और समीक्षा के क्षेत्र में कांगडा के विजय उपाध्याय  ,रंगमच के किये नाहन के राकेश शर्मा ,कला के क्षेत्र में सोलन के डॉ.चमन शर्मा ,लोक संगीत के लिए संगड़ाह के हरिचन्द ठाकुर, शास्त्रीय संगीत के लिए मनोज कुमार ,साहित्य लेखन के लिए नाहन की अनुदीप भारद्वाज , कहानी लेखन में सिरमौर की लेखिका विजय रानी बंसल ,संगीत के लिए डॉ.मृत्युंजय शर्मा ,सकारात्मक पत्रकारिता के क्षेत्र में अक्स मीडिया के प्रधान सम्पादक अरूण साथी और एम बी एम न्यूज नेटवर्क की वरिष्ठ पत्रकार रेणु कश्यप, साहित्य के लिए डॉ.कुलदीप भाटिया ,लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए आरती शर्मा को शंखनाद विशिष्ट सम्मान सिरमौर गौरव -2024 प्रदान किया गया  ,दूसरे सत्र में एक कवि सम्मेलन आयोजित किया गया जिसमें दीपराज विश्वास ,शबनम शर्मा ,रविता ,सुनिता भारद्वाज ,मौ क्युम ,चिरानन्द शास्त्री ,अनिल शर्मा ,भुवन जोशी , डॉ श्रीकांत ,रेणु गोस्वामी ,साधना शर्मा ,दिलीप वशिष्ठ ,गोपाल दिलैक ,एल आर भारद्वाज ,अनुदीप भारद्वाज ,सरला गौतम ,विजय रानी बंसल ,विजय उपाध्याय ,आदि ने काव्य पाठ किया ,

मंगलवार, 5 मार्च 2024

एक खत

 


एक खत  

एक मियाद से

आँखो मे लिखा है

एक सच

कई सदियों से

दिल ने कहा है

क्या  वो खत तुम पढ़ोगे बताओ ज़रा

क्या वो सच तुम सुनोगे बताओ ज़रा

हां बताओ ज़रा .....

हां बताओ ज़रा .....


क्या लिखा  उस  खत मे ये

कोई भी न जाने

जो कहा  इस दिल ने वो

कोई भी न माने

एक कहानी  पुरानी जो

 वक़्त ने लिखी थी

उसमे राजा था, रानी 

कहीं भी नहीं थी

एक नदी थी जो

सागर को मिलने चली थी

खो गई राह मे

या फिर गुम हो गई थी

जो  अधूरी कहानी  है  सुनाओ ज़रा

ये अधूरा  होगा पूरा क्या, बताओ ज़रा

हां बताओ ज़रा

हां सुनाओ ज़रा