मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


फ़ॉलोअर

शनिवार, 6 मार्च 2021

अनुभूतियाँ 05

 अनुभूतियाँ 05


1

सच ही कहा था तुम ने उस दिन, 

" जा तो रही हूँ  सजल नयन से"

छन्द छन्द में उभरूँगी मैं,  

गीत लिखोगे कभी लगन से। "


2

सुख-दुख का ताना-बाना है,

जीवन है रंगीन  चदरिया ।

नयनो के जल से धोता हूँ,

हँसी खुशी यह कटे उमरिया।


3

बरसों से सच समझ रहे थे ,

लेकिन वह था भरम हमारा।

भला किया जो तोड़ गई तुम

आभारी दिल, करम तुम्हारा ।


4

दीप भले हो और किसी का

ज्योति प्रीत की आती तो है।

पीड़ा मेरी चुपके चुपके ,

किरनों से बतियाती तो है 


-आनन्द.पाठक-


16 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (07-03-2021) को    "किरचें मन की"  (चर्चा अंक- 3998)     पर भी होगी। 
    -- 
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है। 
    --  
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ-    
    --
    सादर...! 
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --

    जवाब देंहटाएं
  2. सुंदर निर्गुण छंद..सुंदर सृजन ..

    जवाब देंहटाएं
  3. सच ही कहा था तुम ने उस दिन,

    " जा तो रही हूँ सजल नयन से"

    छन्द छन्द में उभरूँगी मैं,

    गीत लिखोगे कभी लगन से। "

    वाह श्रीमान! क्या खूब लिकग है आपने। बहुत ही सुंदर कविता! प्रणाम स्वीकार करें 🙏

    जवाब देंहटाएं
  4. अनुपम! छंद में व्यक्त होने की बात । तब जब लिखोगे लगन से । पढ़ कर बहुत अच्छा लगा ।

    जवाब देंहटाएं
  5. वाह! बहुत सुंदर सृजन मन को छूता।
    सादर

    जवाब देंहटाएं