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सोमवार, 15 मार्च 2021

बता तेरी ख्वाहिश का

 


बस खर्च बता तू ख्वाहिश का 

तेरी गुल्लक भी बन जाऊं मैं


सपनों के कारोबारी में 

तेरा नफ़ा ही बन जाऊं  मैं 


तेरे सुख दुख के बहीखाते से

हर  दुख को ही हर जाऊं मैं 


खुशियों के सिक्के चंद बनूं

तुझ पे जी  भर लुट जाऊं मैं  


हर हुक्म की बस तामील करूं 

 जिन्न   जादुई बन जाऊं मैं 


मैं मोह  और मायाजाल मैं ही

तेरा मोक्ष भी बन जाऊं मैं 


तू खर्च बता तेरी ख्वाहिश का

एटीएम भी बन जाऊं मैं ..


3 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल बुधवार (17-03-2021) को    "अपने घर में ताला और दूसरों के घर में ताँक-झाँक"   (चर्चा अंक-4008)    पर भी होगी। 
    --   
    मित्रों! कुछ वर्षों से ब्लॉगों का संक्रमणकाल चल रहा है। आप अन्य सामाजिक साइटों के अतिरिक्त दिल खोलकर दूसरों के ब्लॉगों पर भी अपनी टिप्पणी दीजिए। जिससे कि ब्लॉगों को जीवित रखा जा सके। चर्चा मंच का उद्देश्य उन ब्लॉगों को भी महत्व देना है जो टिप्पणियों के लिए तरसते रहते हैं क्योंकि उनका प्रसारण कहीं हो भी नहीं रहा है। ऐसे में चर्चा मंच विगत बारह वर्षों से अपने धर्म को निभा रहा है। 
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक' 
    --  

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