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शुक्रवार, 25 जनवरी 2019


निमंत्रण

‘क्या तुम्हें पूरा विश्वास है कि यह निमंत्रण इस ग्रह के निवासियों के लिये है? मुझे तो लगता है कि किसी भी ग्रह के वासी पृथ्वी-वासियों को अपने यहाँ नहीं बुलाना चाहेंगे!’
‘क्यों? क्या खराबी है इन जीवों में?’
‘तुम्हें पूछना चाहिए कि क्या खराबी नहीं है इनमें!’
एलियंस का अन्तरिक्ष-यान अभी भी पृथ्वी से कई लाख मील दूर था लेकिन यान की हर प्रणाली चेतावनी संकेत दे रही थी.
‘चेतावनी! चेतावनी! चेतावनी! इस ग्रह की हर वस्तु दूषित प्रतीत होती है, लोगों के मन और हृदय भी. हम लोगों से अवश्य ही कोई गलती हुई है. इस ग्रह के वासियों को हम अपने ग्रह पर नहीं आने दे सकते, कभी नहीं. यह निमंत्रण तो मैं वापस ले जाऊँगा.........चलो, लौट चलें.’
‘आप ठीक कह रहे हैं. हमें तो अपने अपराधियों को इस ग्रह पर भेज देना चाहिये.......’
‘सच में,  उनको नरक भेजने समान होगा ऐसा दंड.’ 

1 टिप्पणी:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (26-01-2019) को "गणतन्त्र दिवस की शुभकामनाएँ" (चर्चा अंक-3228) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
    जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
    गणतन्त्र दिवस की
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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