मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

शनिवार, 8 नवंबर 2014

किं आश्चर्यम

किं आश्चर्यम 

महाभारत में वृत्तांत है यक्ष ने युधिष्ठिर से जो ६० सवाल पूछे थे उनमें से एक यह 

भी था ,कि युधिष्ठिर यह बतलाओ इस विश्व में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है। तब 

युधिष्ठिर ने जो कहा वह इस प्रकार था :

अहानि अहानि भूतानि ,गच्छन्ति यम मन्दिरम् । 

शेषा : जीवितुं इच्छन्ति किं आश्चर्यम अत : परं .  

इसका अर्थ कुछ कुछ यूं होगा प्रतिदिन जितने  भी प्राणि है मृत्यु की तरफ जा 

रहे 

हैं। यह देखते हुए भी शेष जो लोग हैं वह जीवन की जो आशा है उसके मोह से 

मुक्त नहीं हो रहे हैं। इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है। 

Perhaps intuitively one knows that there is some portion of us 

which never dies .But why then there is fear of death ?

The answer is ignorance of the self .

"that I am that consciousness which is eternal and all pervading ."

"सत्यं  ज्ञानम् अनन्तं "

Once they know that ,the fear will vanish .

3 टिप्‍पणियां:

  1. प्रतिदिन जितने भी प्राणि है मृत्यु की तरफ जा रहे हैं। यह देखते हुए भी शेष जो लोग हैं वह जीवन की जो आशा है उसके मोह से मुक्त नहीं हो रहे हैं। इससे बड़ा आश्चर्य और क्या हो सकता है।
    सत्यं ज्ञानम् अनन्तं...
    ..प्रेरक प्रस्तुति ..

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (09-11-2014) को "स्थापना दिवस उत्तराखण्ड का इतिहास" (चर्चा मंच-1792) पर भी होगी।
    --
    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

    उत्तर देंहटाएं