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रविवार, 2 अक्तूबर 2016

उफ्फ्फ्फ! ये असहिष्णुता - एक टिप्पणी

हद हो गई भई!
असिहष्णुता अब देश की सीमायें भी पार कर गई। ये मोदी जी के राज में असहिष्णुता किस हद तक जा चुकी है। ज़रा सा आतंक बर्दाश्त नहीं होता इस सरकार से। बेचारे अपने बाप की गोद में खेलते मासूमों को मार दिया। अभी उन मासूमों ने बिगाड़ा ही क्या था। अभी तो उनको कितने बम फोड़ने थे। भारत की जनसँख्या कम करने का चुनौतीपूर्ण काम करना था। जेल की बिरयानी खानी थी। इस असहिष्णु सरकार ने सारी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। 
अब तो आमिर भाई की पत्नी विदेश जाने के लिए बोरिया समेट चुकी होगी। पर जायेगी भी कहाँ अब तो ये सरकार सीमा पार भी अपनी पहुँच बनाने लगी है। बहुत सारे लोग अवार्ड के साथ साथ रिवॉर्ड भी वापस करने लगेंगे। अब तथाकथित बुद्धिजीवियों की विशेष कॉफी हाउसों में बैठकें होंगी। महंगी शराब के घूँट लगाए जाएंगे। सरकार को भर भर कर कोसा जायगा। रविश भाई को गूगल करके नई नई कहानियाँ निकालनी पड़ेंगी। 
उफ्फ्फ्फ! ये असहिष्णुता, कितने लोगों का काम बढ़ जायेगा।

1 टिप्पणी:

  1. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि- आपकी इस प्रविष्टि के लिंक की चर्चा कल सोमवार (03-10-2016) के चर्चा मंच "कुछ बातें आज के हालात पर" (चर्चा अंक-2483) पर भी होगी!
    महात्मा गान्धी और पं. लालबहादुर शास्त्री की जयन्ती की बधायी।
    साथ ही शारदेय नवरात्रों की हार्दिक शुभकामनाएँ।
    डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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