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सोमवार, 29 जुलाई 2013

इबादत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे..........मनीष गुप्ता



यूँ ना इस अंदाज़ में हमको देखा करो
मुहब्बत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

ये शोख अदाएं अक्सर बहकाती हैं दिल को
शरारत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

इन निगाहों में घर बसा लो हसीन ख्याबों के
कयामत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

सुना है बहुत नाज़ुक दिल रखते हैं आप
इनायत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

बड़ा हुजूम है इश्क़ के मारों का आपके शहर में
बगावत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

बहुत बेताब है वस्ले शब की तमन्ना दिल में
मुखातिब हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

कभी लगती है खुदाया सी आपकी नवाजिशें
इबादत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

-मनीष गुप्ता

8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर रचना पोस्ट की है आपने!
    यशोदा बहन आपका आभार!
    आपका ब्लॉग में आपका स्वागत है और अभिनन्दन भी!

    उत्तर देंहटाएं
  2. मैं भी यशोदा जी की इस कला से बहुत वक्त से वाकिफ़ हूँ ...बहुत कम लोग ऐसे हैं जो हर किसी को बढ़ावा देते हैं ...
    सच में आज की साँझा की गई कृति ...बहुत खूबसूरत है

    उत्तर देंहटाएं
  3. सुना है बहुत नाज़ुक दिल रखते हैं आप
    इनायत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे
    खूबसरत पंक्तियाँ.......
    बधाई ....

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर प्रस्तुति ....!!
    आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल मंगलवार (30-07-2013) को में” "शम्मा सारी रात जली" (चर्चा मंच-अंकः1322) पर भी होगी!
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  5. कभी लगती है खुदाया सी आपकी नवाजिशें
    इबादत हो गयी तो फिर ना कहना हमसे

    बहुत सुन्दर
    लाजवाब

    उत्तर देंहटाएं