मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

मंगलवार, 30 जुलाई 2013

बापू वापिस आ जाओ




राष्ट्र-पिताजी आप स्वर्ग में,परियों के संग खेल रहे हैं |
इधर आपके , चेले-चांटे ,अरब-खरब में खेल रहे हैं |

बचे-खुचे अनुगामी जितने,जीवन अपना ठेल रहे  हैं |
फटी लंगोटी तन पर लेकर,मंहगाई को  झेल रहे  हैं |

भारत से सम्बन्धित बापू,गणित तुम्हारा सही नहीं था |
कुछ दिन रहता सैन्यतंत्र में,प्रजातंत्र के योग्य नहीं था |

नियमों में पलने की आदत,खाद बना कर डाली जाती |
फिर नेता की फसल उगाकर,प्रजातंत्र में डाली  जाती |

आज सभी को है आजादी,लुटती-फिरती जनता सारी |
मक्खन खाते नेता अफसर,छाछ न पाती किस्मत मारी |

मंहगाई से त्रस्त सभी  हैं,गायब माल नहीं दिखता है |
दाल मिल रही सौ की केजी,आटा तीस रूपये मिलता है |

आलू तीस रूपये तक चढकर,अब नीचे कुछ आ पाया है |
प्याज बिक रही इतनी मंहगी,तड़का तक ना लग पाया है |

बड़ी कम्पनी माल घटा कर,कीमत पूरी ले  लेती  है |
अधिकारी  धृतराष्ट्र  बनाए-,कुछ जूठन उनको देती है |

कर्ज उठाते, नोट   छापते,धन जब जेबों में आता  है |
पैसा ज्यादा,माल अगर कम,मूल्य एकदम बढ जाता  है |

अर्थ-शास्त्री पी.एम. अपने,इतना फण्डा समझ न पाते |
भारत ला कर,एफ.डी.आई,वे विकास का चित्र दिखाते |

धीरे-धीरे देश सिमट  कर-,उन के बन्धन में आया है |
भारत मां को बंधक रखकर,नेता  शर्म   नहीं खाया है |

बेच रहे हैं देश कुतर  कर,अपनी सत्ता  कायम  रखने |
धर्म जाति में नफरत  डालें,मन में दूरी  कायम  करने |

बापू इस स्वतंत्र दिवस पर,तुम लाठी ले वापस आओ |
ठोक पीट कर नेता अफसर,प्रजातंत्र  पटरी पर  लाओ | 
***

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपने लिखा....
    हमने पढ़ा....और लोग भी पढ़ें;
    इसलिए बुधवार 031/07/2013 को http://nayi-purani-halchal.blogspot.in ....पर लिंक की जाएगी.
    आप भी देख लीजिएगा एक नज़र ....
    लिंक में आपका स्वागत है .
    धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. आपकी अनुकम्पा के लिए आपका आभारी हूँ |

      हटाएं
  2. उम्दा पंक्तियाँ .बहुत सटीक और सामयिक ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. साठ साल से झेल रहे बापू के रिश्तेदारों को
    अब तो धूल चटानी होगी देश के इन गद्दारों को

    उत्तर देंहटाएं