मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

बुधवार, 5 फ़रवरी 2014

चले थे तुम यहाँ ---पथिकअनजाना –476 वीं पोस्ट







                 कर गम दिल जो छीन रहा उस दुनियायी ताज का
न भर दम ए दिल तुम जीते अपने उस राजसाज का
हुई शाम जिन्दगी की जल्दी जाओ अपने मालिक दर
वर्ना परेशां आत्मा होगी पुर्नजर्न्मों के चोले  बदलकर
माना कि चले थे तुम यहाँ हर पग संभल संभल कर
मगर हालात देते राह तुम्हें गये घेरे तुमको छल बल
उतार फेंको ऐसा आवरण न जीने दे जो न मरणवरण
मत गर्व करो सफल तुम्हारे चरण चल रहा चीरहरण
तुमने क्या कमाया खोया छोडोजाओ राहे सुकर्म शरण
कमाया वह गांठ में जो खोया अपना नहीतो कैसा भ्रम
पथिक अनजाना



कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें