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मंगलवार, 17 मार्च 2015

तरुवर पात सौं यौ कहे ,सुनो पात बात , यह घर याही रीत है ,इक आवत एक जात।



The tree doth to the leaf say thus :

'O leaf '.listen to what I say :

In this house there's the tradition -

One comes ,the other goes away .

पत्ता टूटा डारि से ले गई पवन उड़ाय ,

अब के बिछुरे कब मिलइ  ,दूर पड़ेंगे जाय।

मालन  आवत देखि करि ,कलियाँ करी पुकार ,

फूले फूले चुनि लिये ,काल्हि हमारी बार।

On seeing gardener's wife come

Shout aloud the buds that are young ,

'All flowers in bloom are picked up

So tomorrow will be our turn .

बाढ़ी  आवत देखि करि ,तरवर दोलन लाग ,

हम कटे की कुछ नहीं ,पंखेरू घर भाग।

On seeing the tree feller come

The tree in terror starts to shake ;

'It doth not matter if I'm felled ,

O bird ,homeward thy flight take .


फागुण आवत देखि करि ,बन रूना मन माँहि ,

 ऊंची डाली पात है,दिन दिन पीले थांहि।

Seeing the month of Phagun  come ,

In his heart of heart the tree weeps ;

'My branches are tall but my leaves

Grow pale as day after day creeps' .

मंदिर माँहि झबूकती ,दीवा कइसी जोति ,

हंस बटाऊ चलि गया ,काढ़ौ घर की छोति।

Similar to light of a lamp ,

Soul illumines the body -house ,

When swan -sojourner doth depart

The untouchable's taken out .

यह तन काचा कुम्भ है ,चोट चहुँ दिस खाइ ,

एक राम के नाँव बिन  ,जदि तदि प्रलै जाइ।

This body is a brittle pitcher

From four directions which is hit ,

Without the canoe of Ram's name

Deluges too oft will drift .

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