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बुधवार, 10 सितंबर 2014

चन्द माहिया : क़िस्त 08



:01:

जो याद तुम्हारी है
उन से ही दुनिया
आबाद हमारी है

;02:

जब तक कि सँभल पाता
राह-ए-उल्फ़त में
ठोकर हूँ नई खाता

:03:

लहराओ न यूँ आँचल
दिल तो दिल ही है
हो जाय न फिर पागल

;04:

जीने का ज़रिया था
सूख गया वो भी
जो प्यार का दरिया था

:05:

गिरते न फिसलते हम
काश ! सफ़र में तुम
चलते जो साथ सनम

-आनन्द.पाठक
09413395592

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