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रविवार, 14 दिसंबर 2014

हे राम !



हे राम !

बुरे दिन आते हैं तो इकठ्ठे आते हैं। कुछ ऐसा ही कांग्रेस  के साथ घट रहा है।हैरानी की बात तो यह है कि वास्तविक संकट हो तो उसका तो निदान कर लिया जाए पर कांग्रेस की बची खुची जमात में अब ऐसे लोग ज्यादा बचे हैं जो अपने क्रिया कलापों से हंसी का पात्र बनते हैं। अब जैसे साक्षी महाराज (सांसद ,भाजपा )ने  यह कह दिया कि महात्मा गांधी को मारने वाले नाथू राम गोडसे देशद्रोही नहीं थे। ये दोनों बातें परस्पर विरोधी नहीं हैं। अपने वैचारिक आवेश के कारण नाथू राम गोडसे ने यह गलत काम किया और हिंसा का सहारा लेकर देवपुरुष सरीखे महात्मा गांधी की ह्त्या कर दी। पर इस कृत्य का सम्बन्ध देशभक्ति और देशद्रोह दोनों पक्षों से नहीं है। पर कांग्रेसियों को कौन समझाए। वे फटी बांस में अपना पैर फंसाने के आदि है। महात्मा गांधी की समाधि पे जाकर प्रदर्शन की मुद्रा में हे राम !हे राम !करने लगे। 

जो श्री राम के नाम की ऐतिहासिकता को ही नहीं मानते उन्हें नाम के नाम उच्चारण में साम्प्रदायिकता नज़र आती है। ऐसे कांग्रेसियों के सेकुलर मुखों से महात्मा गांधी का अनुकरण करते हुए मृत्यु वेला में उनके मुख से निकले हे राम !शब्द के उच्चारण करने के अनुकरण की क्या  ज़रुरत आन पड़ी  थी। 

अब लोगों की जुबां कौन बंद कर सकता है। अब वे कहते हैं कि ये कांग्रेसी अपनी अवसान वेला को देखकर हे राम ! करने लगे हैं। कमसे कम कांग्रेसी करोड़ों लोगों की आस्था के प्रतीक राम नाम का ऐसा प्रसंगहीन उच्चारण तो न करें कि मूल विषय ओझल हो जाए और लोग उनके क्रियाकलापों पर हंसने लगें। अब तो लोग भी कांग्रेस की स्थिति को देखकर यही कह रहे हैं कि हे राम !हे राम !हे राम ! 

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल सोमवार (15-12-2014) को "कोहरे की खुशबू में उसकी भी खुशबू" (चर्चा-1828) पर भी होगी।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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