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सोमवार, 8 दिसंबर 2014

नहाना .....


शावर में जब गया नहाने......

लगा पानी की धारा
जैसे गंगा सा
बहता प्यार हमारा
गर्म नर्म पानी
ने मुझ को यूँ लपेटा
आगोश में हो तूने
जैसे मुझे समेटा

भाप उठती रही
गर्म पानी से ऐसे
तेरी मंडराती रूह आयी हो
जैसे जोड़ने अपने नाते

तेज पानी सर पे रहा
ऐसे थप थपाता
सोये एहसासों को
जैसे हो जगाता

पानी फ़र्श से टकराता
रहा ऐसी धुन लगाता
मेरी उमंगो के गीत
जैसे वोह हो गाता

पानी की ये बूंदें
सब मिलके धीरे धीरे
तेरी भावनाओं से मेरे
दिल को हो जैसे सिलाता

जो मैल थी दुनिया की
तन मन पे जम आयी
साबुन से धो मैंने
आत्मा है सजाई

दिल ने मेरे फिर
मीठी सी धुन लगाई
न जाने क्यों गा उठा मैं
तेरे प्यार की शहनाई

शीशे पे धुंद जमी थी
उंगली से यूँ लिखा था
"मुझे भूलना नहीं तुम
मेरा प्यार जगा के रखना"
क्या तुमने ये लिखा था

गीला बदन ये मेरा
तेरी प्यास से सुकाया
फिर मैंने इत्र जब लगाया
तेरी याद में जा खोया
तुझे याद कर के रोया

न आया कर तू हरदम
हर वक़्त इस तरह से
दर्द मेरा तू नहीं जानती
और तेरी ख़ामोशी
मुझ से बातें करने से नहीं मानती
                                                  ......इंतज़ार

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