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सोमवार, 23 दिसंबर 2013

दुनिया मात्र बारात हैं-----पथिक अनजाना (सतनाम सिंह साहनी ) ----४२९ वीं पोस्ट








                                                        दुनिया मात्र बारात हैं  ४२९
 बुद्धिमता की सर्वोच्च पहचान क्या होती है
सजाया कैसे उत्तम ढंग से जीवन मोती हैं
समझ सोच व निर्णय क्या इंसा के हाथ हैं
हालात .हार्दिक लोभ दिलाते शह या मात हैं
चातुर्य प्रदर्शन मंच  दुनिया उसके साथ हैं
जब भोगते तब माने दुनिया मात्र बारात हैं

2 टिप्‍पणियां:

  1. वाह ! अनुराग-वैराग्य का सुन्दर समागम ! भौतिकवाद की ओर संकेत !!

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  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज मंगलवार (24-12-13) को मंगलवारीय चर्चा 1471 --"सुधरेंगे बिगड़े हुए हाल" पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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