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सोमवार, 30 दिसंबर 2013

दो साहिल नफरत व मुहब्बत ---पथिक अनजाना ---४३६ वीं पोस्ट





                                          दो साहिल नफरत व मुहब्बत   (436 वीं  पोस्ट )
मानवीय जीवन में  सदैव से हावी
दो साहिल नफरत व मुहब्बत हैं
अपनी सारी जिन्दगी में ये इंसान
दोनों साहिलों से चाहे अनचाहे वह
कर्मों व किस्मत से किसी न किसी
कारणवश रूबरू या अन्य कोण से
अन्तत: बेचारा टकरा ही जाता हैं
गर खुश हुआ तो योजना अपनी
गर मायूसी लगी सारा दोष गैरों पर
झलक ही जाती रेखायें चेहरों पर
लेते सांस ताडने वालों के पहरों पर
लगता जीते दुनियायी मेहरों पर हैं
पथिक अनजाना

3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (31-12-13) को "वर्ष 2013 की अन्तिम चर्चा" (चर्चा मंच : अंक 1478) पर भी होगी!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    2013 को विदायी और 2014 की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. सुन्दर !
    नया वर्ष २०१४ मंगलमय हो |सुख ,शांति ,स्वास्थ्यकर हो |कल्याणकारी हो |
    नई पोस्ट नया वर्ष !
    नई पोस्ट मिशन मून

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