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शुक्रवार, 20 जून 2014

चन्द माहिया : क़िस्त-02

 :1:

किस बात पे हो रूठे
किसने कहा तुम से
सब रिश्ते हैं झूठे

:2:

जाना था तो न आते
आ ही गये हो जब
कुछ देर ठहर जाते

:3:

जब तुमने नहीं जाना
मेरे सच का सच
दुनिया ने कब माना

:4:

आँखों के अन्दर है
बाहर निकले तो
आँसू भी समन्दर है

:5: 

आँसू में छुपाये ग़म
कहने को क़तरा
दरिया से नहीं है कम


-आनन्द.पाठक
09413395592

[नोट : माहिया निगारी पर विशेष आलेख आप देख सकते हैं मेरे ब्लाग पर
www.urdu-se-hindi.blogspot.in ]

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (21-06-2014) को "ख्वाहिश .... रचना - रच ना" (चर्चा मंच 1650) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    उत्तर देंहटाएं
  2. उत्तर
    1. आ0 कविता जी
      सराहना के लिए आप का बहुत बहुत धन्यवाद
      सादर
      -आनन्द.पाठक
      09413395592

      हटाएं
  3. आ0 जोशी जी/शास्त्री जी/जानू बरुआ जी/ओंकार जी/कविता जी
    माहिया की सराहना के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद
    सादर
    -आनन्द.पाठक
    09413395592

    उत्तर देंहटाएं