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शुक्रवार, 13 जून 2014

चन्द माहिया




ये हुस्न का जादू है
सर तो सजदे में
दिल पे कब क़ाबू है


आँखों में उतरना है
दिल ने टोक दिया
कुछ और सँवरना है


हम राह निहारेंगे
आओ नइ आओ
हम तुमको पुकारेंगे


ख़्वाबों में बुला कर तुम
छुप जाती हो क्यों
कुछ सपने चुरा कर तुम


इक देश हमें जाना
कैसा होगा वो 
जो देश है अनजाना


-आनन्द.पाठक
09413395592

6 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
    --
    आपकी इस' प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (14-06-2014) को "इंतज़ार का ज़ायका" (चर्चा मंच-1643) पर भी होगी!
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति सराहनीय ..
    भ्रमर ५

    उत्तर देंहटाएं
  3. आ0 शास्त्री जी/भ्रमर जी/ओंकार जी/बाणभट्ट जी

    माहिया की सराहना के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद
    उर्दू शायरी में ’माहिया निगारी’-पर एक आलेख अपने ब्लाग www.urdu-se-hindi.blogspot.in पर लगाया है
    यदि आप चाहें तो वहाँ इसे पढ़ सकते हैं जिससे ’माहिया’ समझने में और आसानी होगी
    सादर
    -आनन्द.पाठक
    09413395592

    उत्तर देंहटाएं
  4. आ0 शास्त्री जी/भ्रमर जी/ओंकार जी/बाणभट्ट जी

    माहिया की सराहना के लिए आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद
    उर्दू शायरी में ’माहिया निगारी’-पर एक आलेख अपने ब्लाग www.urdu-se-hindi.blogspot.in पर लगाया है
    यदि आप चाहें तो वहाँ इसे पढ़ सकते हैं जिससे ’माहिया’ समझने में और आसानी होगी
    सादर
    -आनन्द.पाठक
    09413395592

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