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शुक्रवार, 31 अक्तूबर 2014

मोदी के बदले नवाज को न्योता देकर बुखारी ने शांत किया ‘गुस्सा’

दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी ने नायब इमाम की दस्तारबंदी की रस्म में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बुलावा भेजकर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दावत न देकर अपना ‘गुस्सा’ शांत किया है। देश के लोग उन्हें जो चाहे सो कहें पर उनके मन की तृष्णा शांत हो गयी। मेरा इशारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह की ओर है। अधिकृत तौर पर तो नहीं कह सकता पर मीडिया के जरिए जो बात सामने आयी, उसके अनुसार इमाम बुखारी नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री पद के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल नहीं हुए थे। जाहिर है, इसके पीछे यही हो सकता है कि उन्हें इस आयोजन की दावत नहीं मिली रही होगी। अब जब मोदी को बुखारी साहब द्वारा निमंत्रण न देकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दावत भेज दी गई तो इस बात पर चर्चा होने लगी है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शपथ ग्रहण समारोह पड़ोसी देश के प्रधानमंत्रियों को बुलाया गया था। साथ ही देश के प्रमुख धार्मिक व अन्य संस्थाओं के गणमान्य लोगों को ससम्मान आमंत्रित किया गया था। पर उस समय शायद यह भूल हो गयी होगी कि इमाम बुखारी साहब को वह तवज्जो नहीं दी गयी, जिसकी अपेक्षा उन्हें रही होगी। अब इस एक तीर से बुखारी साहब ने अपना गुस्सा शांत कर लिया। यह जाहिर है कि पाकिस्तान जैसे मुल्क के प्रधानमंत्री भारत तभी आएंगे जब भारत सरकार उन्हें आने की अनुमति प्रदान करे। ऐसे में बुखारी साहब को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को दावत भेजने के पहले भारत सरकार से इस बात की अनुमति लेनी चाहिए थी। यह तो मेरा व्यक्तिगत तर्क है। आइए हम जामा मस्जिद के इतिहास की ओर भी झांककर देंखे। मुगल शहंशाह शाहजहां ने दिल्ली की आलीशान जामा मस्जिद तामीर कराई थी। ये मस्जिद 1656 में बनकर तैयार हुई थी। मस्जिद में पहली नमाज 24 जुलाई 1656, दिन सोमवार ईद के मौके पर पढ़ी गई थी। नमाज के बाद इमाम गफूर शाह बुखारी को बादशाह की तरफ से भेजी गई खिलअत (शाही लिबास और दोशाला) दी गई और शाही इमाम का खिताब दिया गया। तभी से शाही इमाम की ये रवायत बरकरार है। खास बात ये है कि बीते 400 साल से बुखारी का खानदान ही पीढ़ी दर पीढ़ी भारत की इस ऐतिहासिक मस्जिद का इमाम बनता आया है। देश में दिल्ली की जामा मस्जिद के इमाम का ओहदा खासा प्रभावशाली माना जाता है। बीते तीन दशक से ये परंपरा बन गई है कि शाही इमाम आम चुनावों या विधानसभा चुनावों के दौरान अक्सर किसी न किसी राजनीतिक पार्टी के समर्थन में एलान करते आए हैं। बुखारी ने समाचार पत्रों के जरिए यह तर्क रखा है कि देश का मुसलमान मोदी से नहीं जुड़ पाया है, इसलिए उन्होंने मोदी को अपने कार्यक्रम में दावत नहीं दी है। उन्होंने 2002 में हुए गुजरात दंगों का भी जिक्र किया है। बुखारी से सवाल है कि सितंबर 2014 में जम्मू-कश्मीर में आयी बाढ़ से तबाह हो गए मुसमान परिवारों के लिए आखिर उन्होंने क्या किया। यही सवाल 2002 के गुजरात दंगों पर भी उनसे है कि उन मुसमान पीडित परिवारों के लिए उन्होंने क्या किया। अब ऐसा बयान देकर देश की कौमी एकता और गंगा-जमुनी तहजीब पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे हैं। निश्चित रुप से बुखारी साहब का यह निजी कदम है, पर उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि वह एक समुदाय विशेष को अपने आचरण से संदेश देते हैं। ऐसे में उनके द्वारा उठाया गया हर कदम देश के लिए उदाहरण बनेगा। जिस आयोजन की चर्चा हो रही है, उसका भी जिक्र होना जरुरी है। दिल्ली की जामा मस्जिद के शाही इमाम सैयद अहमद बुखारी ने अपने 19 साल के बेटे सैयद शाबान बुखारी को अपना उत्तराधिकारी बनाने का एलान किया है। 22 नवंबर को दस्तारबंदी की रस्म के साथ उन्हें नायब इमाम घोषित किया जाएगा। दस्तारबंदी की रस्म में शामिल होने वाले मेहमानों की लिस्ट में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ का तो नाम है, लेकिन अपने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मोदी का नाम गायब है। कार्यक्रम के अनुसार 22 नवंबर को दस्तारबंदी होगी। उस रात और 25 नवंबर को खास मेहमानों के लिए डिनर है। 29 नवंबर को कई मुल्कों के राजनयिक और दिग्गज सियासी हस्तियां शामिल होंगी, लेकिन खास बात ये है कि इनमें से किसी भी कार्यक्रम में मोदी को दावत नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने मोदी कैबिनेट के अनेक मंत्रियों को दावत भेजी है जिनमें गृह मंत्री राजनाथ सिंह, स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन, सैयद शाहनवाज हुसैन और विजय गोयल के नाम शामिल हैं। दस्तारबंदी समारोह के लिए कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी, उपाध्यक्ष राहुल गांधी, समाजवादी पार्टी के नेता मुलायम सिंह यादव और यूपी के सीएम अखिलेश यादव को दावत भेजी गई है। सैयद शाबान बुखारी सोशल वेलफेयर में ग्रेजुएट कोर्स कर रहे हैं। साल 2000 से अहमद बुखारी इमाम हैं। इससे पहले अहमद बुखारी के पिता अब्दुल्लाह बुखारी इमाम थे। अहमद बुखारी अपनी देखरेख में शाबान बुखारी को नायब इमाम के तौर पर ट्रेंड कर रहे हैं।



3 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति।
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल रविवार (02-11-2014) को "प्रेम और समर्पण - मोदी के बदले नवाज" (चर्चा मंच-1785) पर भी होगी।
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    चर्चा मंच के सभी पाठकों को
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. Rochak jaankari 400 saal se raj kar rahe hai peedi dar peedi yah baat badi alag lagi... Sunder prastuti ..aabhar !!

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