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शुक्रवार, 3 अप्रैल 2015

गिरिराज सिंह के कहे का आशय भारत धर्मी समाज की चेतना को जगाना है जो कांग्रेस की सुसुप्ति में हैं

'भारत की मिट्टि  से जन्मा व्यक्ति कांग्रेस का अध्यक्ष कब बनेगा' क्या इस देश में एक भी कांग्रेसी ऐसा नहीं है जो यह पूछ सके। सभी हाई कमान के चाटुकार हैं तलुवे चाटते हैं ?

मान्य गिरिराज सिंह जी ने नस्ली टिप्पणी नहीं की है कांग्रेसियों को भारत की प्रज्ञा की याद दिलाते हुए कहा है गोरे रंग की गुलामी करना छोड़ो यही कहा है। भारत धर्मी समाज की संस्कृति की याद दिलाई है गौरांग प्रभुओं की चिर्कुटीय मुद्रा से मुक्ति का आवाहन किया है।

मान्य मनमोहन सिंह जी ने भी भारत का दैन्य भाव ही उदगार के रूप में अभिव्यक्त किया था ऑक्सफोर्ड में  जाकर उन्होंने कहा आपने हम पर बड़ा उपकार किया हमें  चलना फिरना सीखा दिया अदबीयत सिखला दी हम निपट अपढ़ (गंवार )ही थे।

कांग्रेसियों की दिक्कत ये है ये सिर्फ जैविक माँ को ही माँ मानते हैं ये नहीं जानते गंगा मैया तो उन कांग्रेसियों का भी उद्धार कर देती है जिन्होनें उसे गन्धाया है गंदलाया है मैला किया है।

 इन कांग्रेसियों के लिए शेष माताएँ मदर इन लाज़ हैं और पिता सिर्फ जैविक  पिता हैं।

याद कीजिए आदरणीय नरेंद्र मोदी जी का प्रियंका गांधीके प्रति बेटी सम्बोधन चुनाव पूर्व के अपने एक भाषण में और योरोपीय संस्कृति में पली -बढ़ी प्रियंका का प्रतिवाद में यह कहना मेरे पिता तो सिर्फ राजीव गांधी थे और रहेंगे।

वहां जैविक रिश्ते के सिवाय बेटी का कोई रिश्ता ही नहीं है।

कांग्रेस की संस्कृति ही उघड़ी है ये कहकर की गंगा मैया मोदी की माँ की अस्थियां स्वीकार नहीं करेंगी।

दोहरा दें :कांगेस सिर्फ एक माँ को जानती है -

जैविक माँ को।

जबकि सर्वग्राही (आल इन्क्लूसिव )भारतीय संस्कृति सर्व  अस्तित्व में एक ही  आत्म तत्व को  देखती है। जगत उसके लिए अपनी ही आत्मा का  (आत्म तत्व का ) दर्पण हैं। और जगत के लिए आत्म तत्व भी एक दर्पण हैं। इसीलिए जो एक ही आत्म तत्व को सारी कायनात तमाम अस्तित्व में देखता है और अपने आत्म तत्व में अपने हृद दर्पण में पूरे विश्व को देखता है केवल वही देखता है और शोक और मोह दोनों से मुक्त हो जाता है।

गिरिराज सिंह  जी ने कांग्रेसियों के स्वाभिमान को बस झकझोरा भर है और तमाम कांग्रेसी नाचने लगे हैं साथ ही उन्होंने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है मेरा आशय किसी का अपमान करना नहीं है फिर भी कोई आहत हुआ है तो मैं खेद व्यक्त करता हूँ।

 हाई कमान के नज़रों में चढ़ने के लिए कांग्रेसी इस मुद्दे में उछल कूद मचा रहें हैं ।शाखा मृग की तरह एक डाल से दूसरी पर कूद रहे हैं।

कपिल सिब्बल ,मनीष तिवारी मणिशंकर एयर ,दिग्गी - राजा जैसों को भले कुछ कांग्रेस से लेना देना हो अभी भी लोभ  लालच हो कुछ मिल जाने का एक भोला भाला आम कांग्रेसी तो सच को सच कह ही सकता है। उस सच की व्याख्या कर सकता है जो गिरीराज सिंह जी ने बोला है। और ये कांग्रेसी चापलूस तमाम  किस्म के चिरकुट देश की नाक कटवाने उस नाइजीरिया के दूतावास में पत्रकारों के भेष में पहुँच गए जिसकी राष्ट्र कुल में कोई गिनती नहीं है। धन्य हैं कांग्रेसी और इनकी चर्च द्वारा नियुक्त अभिकर्मिका जिसने आते ही हमारे एक शंकराचार्य को जेल में डाल कर चर्च को साफ़ संकेत दे दिया था मैंने रास्ता खोल दिया है। शेष काम आपको करना है।

जय श्री कृष्णा। 

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (04-04-2015) को "दायरे यादों के" { चर्चा - 1937 } पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक

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  2. एक दम सत्य कहा है वीरेन्द्र जी ...बधाई

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