मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

शुक्रवार, 10 जुलाई 2015

सोचता हूँ अगर घर बाहर ऐसा शख्श न हो तो ऐसे परजीवियों ,परभक्षियों का क्या हो

सोचता हूँ अगर घर बाहर ऐसा शख्श न हो तो ऐसे परजीवियों ,परभक्षियों का क्या हो

मेरा या आपका घर हो या भारत राष्ट्र आसपास ऐसे लोग मिल जाएँगें जो अपनी नाकामयाबियों का ठीकरा आपके सर पे फोड़ना चाहेंगे ,और फोड़ के साफ़ निकल जाएंगे। इनके जीवन में जो भी अच्छा या शुभ होता है वह सिर्फ इनकी और इनकी वजह से होता है ,इनकी वह अप्रतिम उपलब्धि होती है और हर बुरी बात किसी और की वजह से होती है फिर चाहें इन्हें मच्छर काट के निकल जाए या मलेरिया ही हो जाए .

सोचता हूँ अगर घर बाहर ऐसा शख्श न हो तो ऐसे परजीवियों का क्या हो ?घर परिवार चलता रहे इसके लिए ज़रूरी है राष्ट्रीय स्तर पर एक नरेंद्र मोदी हों और और घर में एक ऐसा व्यक्ति हो जो मौके बे -मौक़ा अपना सर हाज़िर कर दे घड़ा फुटवाने के लिए।

घर चलता रहे ये ज़रूरी है।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें