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शनिवार, 4 जुलाई 2015

"दस दोहे" (अमन 'चाँदपुरी')

अमन चाँदपुरी के दस दोहे
पथ तेरा खुद ही सखे, हो जाये आसान।

यदि अंतर की शक्ति की, तू कर ले पहचान।1।
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निश्चित जीवन की दिशा, निश्चित अपनी चाल।
सदा मिलेंगे राह में, कठिनाई के जाल।2।
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चिर निद्रा देने उन्हें, आते कृपा-प्रवीण।3।
निद्रा लें फुटपाथ पर, जो आवास विहीन। 
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गर्मी से भीगा बदन, बरस रही है धूप।
-- तुम जब भी लिखना ग़ज़ल, रखना इनको संग।5। 
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मतला-मक़्ता-काफिया, हैं ग़ज़लों के अंग।
तन पर कपड़ा डाल लो, जले न तेरा रूप।4।
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इस झूठे संसार में, नहीं सत्य का मोल। 
 वानर क्या समझे रतन, है कितना अनमोल।6। 
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नन्हे बच्चे देश के, बन बैठे मज़दूर।
पापिन रोटी ने किया, उफ! ऐसा मज़बूर।7। 
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टूटी-फूटी जिन्दगी, अपनी है जादाद। 
मालिक ने हमसे किया, कभी नहीं संवाद।8। 
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डूब गई सारी फसल, उबर न सका किसान। 
बोझ तले दबकर अमन, निकल रही है जान।9। 
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मार रहें धनवान हैं, निर्धन को अब लात।
उसके किस्मत में नहीं, रही दाल औ' भात।10।

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