मित्रों!

आप सबके लिए “आपका ब्लॉग” तैयार है। यहाँ आप अपनी किसी भी विधा की कृति (जैसे- अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कर सकते हैं।

बस आपको मुझे मेरे ई-मेल roopchandrashastri@gmail.com पर एक मेल करना होगा। मैं आपको “आपका ब्लॉग” पर लेखक के रूप में आमन्त्रित कर दूँगा। आप मेल स्वीकार कीजिए और अपनी अकविता, संस्मरण, मुक्तक, छन्दबद्धरचना, गीत, ग़ज़ल, शालीनचित्र, यात्रासंस्मरण आदि प्रकाशित कीजिए।


समर्थक

शनिवार, 8 अगस्त 2015

साध्वी प्राची की आवाज़ सुनो




पता लगाओ ऐसी कौन सी जमात है जो याक़ूबों के पक्ष में उतर आती है राष्ट्रपति के पास उसकी माफ़ी के लिए काफिला बनकर जाती है। अगर कोई हमारे देश पर हमला कर दे तो उसका समर्थन करने वाला देश द्रोही नहीं कहलायेगा  ?क्या शशीथरूर और दिग्विजय के बयानों में याकूब की फांसी के प्रति एक बे -चैनी नहीं थी?क्या सुप्रीम कोर्ट ने ये नहीं खा कि यदि याकूब मेमन इस आतंकी  साजिश में शामिल नहीं होता तो मुंबई पे विस्फोटकों से हमला न होता।

अन्वेषण करो पता लगाओ कौन सी है वो जमात जो इस देश को तोड़ना चाहती है। क्या संसद के वोट के आधार पर फूलन देवी नहीं पहुंची संसद में ?जिस संसद के सभापति के मुंह के आगे तख्तियां ख्यात सांसद  लहराते हैं वेळ में कूदते हैं वह पवित्र समझी जाए? उसकी पवित्रता के आप सचमुच में कायल हैं या वह आपकी रखैल है ?

पता लगाओ सोनिया मायनो के इस देश में राजनीतिक प्रवेश का मकसद क्या था अब जब कि एकाधिक स्रोतों से ये पुष्ट हो चुका है कि वह केजीबी की डबल एजेंट थीं जिन्होनें आते ही पॉप की जय का जैकारा बोला था शंकराचार्य को अरेस्ट करवाया था। क्यों हमारे सांसद उसके तलुवे चाट रहें हैं बिना उसकी तात्विकता जाने उसकी चापलूसी कर रहे हैं यदि ये मेधा वह अपने माँ बाप की सेवा में लगाएं देश का कुछ भला करें तो तर जाएं।

आखिर वह लोग भी कांग्रेस  के जिनके पैर  कब्र में लटके हुए हैं क्यों चिरकुट-मुद्रा बनाये हुए हैं। सोनिया मायनो के बाद और उसके आगे क्या क्यों इस सवाल से बच रहें हैं।

प्राची साध्वी की आवाज़ ध्यान से सुनो उसने यही सब कहा है। यदि कल को विज्ञान इतना तरक्की कर ले कि सिर्फ डीएनए जांच से यह पता चल जाए कि अमुक व्यक्ति आतंकी है तो ४४ में से ४३ चिरकुट आतंकी ही निकलेंगे। आखिर ये बात तो विज्ञान आज भी चीख चीख के कह रहा है कि बे -वफाई के भी जींस (जीवन इकाइयां ,जीवन खंड )होते हैं। चाकरी चापलूसी के भी।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें