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शनिवार, 16 नवंबर 2013

बहा नाक से खून पर, जमा पाक में धाक -

  



बहा नाक से खून पर, जमा पाक में धाक |
चौबिस वर्षों तक जमा, रहा जमाना ताक |

रहा जमाना ताक, टेस्ट दो सौ कर पूरे |
कर दे ऊँची नाक, बहा ना अश्रु जमूरे |

चला मदारी श्रेष्ठ, दिखाके करतब नाना |
ले लेता संन्यास, उम्र का करे बहाना |। 

2 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति...!
    --
    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा आज रविवार (17-11-2013) को "लख बधाईयाँ" (चर्चा मंचःअंक-1432) पर भी है!
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    गुरू नानक जयन्ती, कार्तिक पूर्णिमा (गंगास्नान) की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ।
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. बहा नाक से खून पर, जमा पाक में धाक |
    चौबिस वर्षों तक जमा, रहा जमाना ताक |

    रहा जमाना ताक, टेस्ट दो सौ कर पूरे |
    कर दे ऊँची नाक, बहा ना अश्रु जमूरे |

    चला मदारी श्रेष्ठ, दिखाके करतब नाना |
    ले लेता संन्यास, उम्र का करे बहाना |।

    किरकेट के हैं शेर हमारे तेंदुलकर ,

    बाउंसर पे बाउंसर फैंकते रहे बोलर।

    उत्तर देंहटाएं